हिसार.
भविष्य में कृषि विश्वविद्यालय का कोई शोधार्थी कृषि, पशु-विज्ञान, पशु-चिकित्सा, मौलिक विज्ञान और गृह विज्ञान से संबंधित शोध ग्रंथों (थीसिस) की नकल नहीं कर सकेगा।
देश के कृषि विश्वविद्यालयों को नियंत्रित करने वाली शीर्ष संस्था भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हिसार) के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी है। इसके पूरा होने के बाद शोध ग्रंथों में होने वाले फजीवाड़े पर रोक लगाई जा सकेगी। परियोजना को ‘कृषि प्रभा’ नाम दिया गया है। ऐसा प्रोजेक्ट शुरू करने वाला हकृवि देश का पहला विश्वविद्यालय होगा। इसके लिए हकृवि को 1.25 करोड़ रुपए का बजट मिला है।
क्या होंगे फायदे:
‘कृषि प्रभा’ के लागू होने पर देश के किसी भी कृषि विश्वविद्यालय में थीसिस की नकल नहीं हो सकेगी। यदि कोशिश हुई भी तो कुछ ही मिनटों में पता चल जाएगा। परियोजना के तहत छात्र यह जान सकेंगे कि अन्य कृषि विवि में किन विषयों पर शोध हो चुके हैं व वर्तमान में क्या शोध चल रहा है। कृषि-प्रभा में ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है जिसके तहत शोधार्थी प्रोजेक्ट की वेबसाइट पर थीसिस के सार-संक्षेप तो पढ़ सकेगा, लेकिन इसकी टेक्स्ट फाइल नहीं खोल सकेगा।
90 हजार में बनेगा डाटा बेस:
देश के 45 कृषि विवि के करीब 90 हजार थीसिस का डाटा बेस तैयार होगा। विश्वविद्यालयों को दिशानिर्देश जारी कर 2000 के बाद हुए शोधों की सीडी भेजने को कहा है। हकृवि को दो विवि से सीडी मिल चुकी है, जबकि माह के अंत तक अन्य विवि से मिल जाएंगी। करीब 15 लाख पृष्ठों को स्कैन कर डाटा बेस तैयार किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने हकृवि पुस्तकालयाध्यक्ष प्रेम सिंह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का स्वतंत्र प्रभारी भी बनाया।