Manoranjan
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नहीं-नहीं, दीपिका, रणबीर को अपना दिल न तोड़ने की मिन्नतें नहीं कर रहीं। रणबीर तो उनका दिल बड़े प्यार से संभाले हुए हैं। दीपिका तो बाक़ी सब लड़कों को हिदायत दे रही हैं कि वे लड़कियों को तंग न करें और न ही उनका दिल तोड़ें..
‘बचना ए हसीनो’ की कामयाबी के प्रति आश्वस्त थीं?
जब हम लोग एक फिल्म बनाते हैं, हम सभी उम्मीद करते हैं कि फिल्म अच्छा करे। हम सब लोग काफ़ी मेहनत करते हैं, तब सफलता और फिल्म का हिट होना हमारे लिए सेकेंडरी चीज होती है।
आपके लिए फिल्म की सफलता की परिभाषा क्या है?
ओबवियसली, एक तो दर्शकों को फिल्म पसंद आनी चाहिए, दूसरा मीडिया को पसंद आनी चाहिए। यह सबसे महत्वपूर्ण है। ‘बचना ए हसीनो’ में जिस तरह की रिलेशनशिप को दिखाया गया है, उससे कई लोग अपने आपको रिलेट करते हैं, तो फिल्म में यह बात होनी चाहिए। इस फिल्म में चार मुख्य किरदार हैं, जिनमें से किसी न किसी से सभी यूथ ने अपने आपको रिलेट किया है। इनके अलावा फिल्म के सांग, स्टाइलिंग, लोकेशन वग़ैरह सब अच्छे हों, तो फिल्म को अच्छा रिस्पांस मिलता है।
आपके रोल की लंबाई इस फिल्म में कम थी?
मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैंने कई पुरानी फिल्मों में देखा है कि कई बड़े एक्टर्स ने छोटे-छोटे, पर अच्छे रोल किए हैं, जिनमें उनकी परफॉर्मेस बड़ी बेहतर रही है। मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि फिल्म लोगों को पसंद आए। कोई आदमी मुझसे आकर कहे कि उसे मेरी परफार्मेस अच्छी लगी है, यह मेरे लिए Êयादा महत्वपूर्ण है।
आप अपने कैरेक्टर से रिलेट करती हैं?
डेफिनेटली, क्योंकि मैं विश्वास करती हूं कि हमें अपने काम पर अच्छा फोकस करना चाहिए। इसके साथ-साथ हमें अपनी हैप्पी रिलेशनशिप को भी मेंटेन रखना चाहिए।
एक्ट्रेस के तौर पर आपके लिए सफलता की परिभाषा क्या है?
एक्ट्रेस के तौर पर मेरे लिए सबसे अच्छी बात यह रही है कि जो बड़े-बड़े डायरैक्टर्स हैं, उनको मेरा काम काफ़ी पसंद आया है। काफ़ी डायरैक्टर्स ने मुझे एसएमएस किए और कहा कि ‘ओम शांति ओम’ के बाद अपनी दूसरी ही फिल्म में मैंने अच्छी परफॉर्मेस दी है, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ी बात है। उनके अलावा मेरे कई प्रशंसक मेरे पास आए हैं और उन्होंने मेरी परफार्मेस की तारीफ़ की है।
‘ओम शांति ओम’ की डायरैक्टर फ़रहा ख़ान ने भी फिल्म देखी?
जी हां, मैंने सुना है कि फ़रहा को फिल्म पसंद आई है। फ़रहा ने मुझे भी फ़ोन कर कहा कि उन्हें फिल्म पसंद आई है। मेरी परफॉर्मेस पसंद आई है। मैं उम्मीद कर रही हूं कि फ़रहा के साथ कुछ और फिल्में करूं।
अपनी सफलता को किस तरह से सैलिब्रेट करती हैं?
मैं Êयादा सैलिब्रेट नहीं करती हूं। मैं सोचती हूं कि जब फिल्म रिलीज होती है, तब उससे Êयादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए। जब फिल्म अच्छा करती है, तो वैरीगुड और अगर नहीं चलती है, तो ओके कहती हूं और अपने आगे के काम पर फोकस करती हूं।
‘ओम शांति ओम’ और ‘बचना..’ दो बड़ी फिल्मों की कामयाबी आपको मिली है। कुछ और जिम्मेदारी महसूस कर रही हैं?
इसका प्रैशर तो बिल्कुल नहीं है क्योंकि जब मैं एक फिल्म करती हूं, तो मैं सिर्फ़ अपने सीन और शॉट पर ध्यान देती हूं। पूरी फिल्म की चिंता नहीं करती हूं।
अगली फिल्म?
यस, ‘चांदनी चौक टू चाइना’ है, अक्षय कुमार के साथ। निखिल आडवानी इसके डायरैक्टर हैं। उसके बाद इम्तियाज अली की फिल्म है, जिसमें सैफ़ अली ख़ान मेरे अपोजिट हैं। उसका टाइटल अभी तय नहीं हुआ है।
आपके पिताजी प्रकाश पादुकोण की क्या प्रतिक्रिया रही, इस दूसरी हिट के बारे में?
वह काफ़ी ख़ुश थे। उनके अलावा बैंगलौर में कई लोगों को फिल्म अच्छी लगी। मैं उन सभी को शुक्रिया अदा करती हूं।
लड़कियों को क्या सलाह देना चाहेंगी, ‘बचना ऐ हसीनो’ का यह कैरेक्टर करने के बाद?
लड़कियों को यही सलाह दूंगी कि अपने काम पर ध्यान देना बहुत जरूरी है, पर अगर आप प्यार में विश्वास करती हों, शादी में विश्वास करती हों, तो उन्हें भी जीवन में महत्व देना चाहिए।
और लड़कों को?
लड़कों को यह जरूर कहूंगी कि लड़कियों को तंग मत करना। उनका दिल मत तोड़ना।