भोपाल. खादी के कुरते, गले में गमछा और ठेठ देहाती भाषा में मतदाताओं से संवाद करने वाले नेता अब नई टेक्नोलॉजी के रंग में रंग गए हैं।
मोबाइल तो जैसे गुजरे जमाने की बात हो ये नेता अब लेपटॉप और पामटॉप जैसे अत्याधुनिक संचार साधनों का उपयोग कर रहे हैं। इन्हें अब दूरदराज के क्षेत्र की जानकारी के लिए नक्शे ढूंढ़ने की जरूरत नहीं, बल्कि एक क्लिक में डाटाबेस से सारी जानकारी निकाल रहे हैं।
जी हां, विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे कांग्रेस और भाजपा के प्रमुख नेताओं की जीवन शैली और कार्यप्रणाली में इस बार बहुत बदलाव दिखाई दे रहा है। ई-मेल, एसएमएस और एमएमएस से आगे बढ़कर अत्याधुनिक संचार सुविधाएं उनके कामकाज का हिस्सा बन गई हैं।
हाईटेक नेताओं की राय: प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष अनिल दवे कहते हैं कि राजनीति के कामकाज में तकनीक सिर्फ टूल है और परिवर्तन के साथ उसका उपयोग कर रहे हैं।
टेक्नोलॉजी से अपने आपको अपडेट किया जा सकता है, पर उसमें संवेदना नहीं होती है, वह कभी भी धोखा दे सकती है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कहना है कि नई तकनीकी से मेरी राजनीतिक कार्यशैली में आमूलचूल बदलाव आया है। निश्चित रूप से आज के युग में हाईटेक होना भी अपने आपमें जमाने के साथ कदमताल करना है।