इंदौर. जैन समाज में पर्वाधिराज पयरुषण का समापन क्षमावाणी के साथ होता है। इसका सिर्फ बोलनेभर का महत्व नहीं है बल्कि यह रिश्तों के बीच की दरार और खटास को दूर कर मिठास घोल देती है।
मिच्छामी दुक्कड़म सिर्फ क्षमा मांगने का शब्द नहीं है इसमें अपराध बोध के साथ वह निर्मल मन है जो क्षमाभाव से परिपूर्ण है। इसमें खास बात यह होती है कि क्षमा मांगने के साथ ही क्षमा देने वाला भी उतने ही विनम्र भाव से गले मिलता है। भास्कर को कई लोगों ने बताया लोगों ने कैसी-कैसी भूलें की और उन्हें किस तरह क्षमा मिली।
उस बच्ची से हर साल मांगता हूं क्षमा
क्लर्क कॉलोनी के टाइल्स व्यवसायी दिलीप जैन ने बताया एक बार उन्होंने अपनी नन्ही भानजी को बिना बताए पैसे ले जाने की बात पर जमकर डांट दिया था। बाद में पता चला वह मेरे लिए ही दवा खरीदने मेरी पत्नी के कहने पर गई थी। उसका पश्चाताप मुझे आज भी है। मुझे यह सीख हमेशा के लिए मिल गई कि बिना पूरी बात जाने किसी को गलत नहीं समझना चाहिए। मैं अपनी इस गलती के लिए हर क्षमावाणी पर उससे क्षमा मांगता हूं।
चला मिच्छामी दुक्कड़म का महामंत्र
बांबे हॉस्पिटल चौराहे के पास रहने वाली ब्यूटीशियन चेताली जैन ने बताया मेरी वर्षो पुरानी एक सहेली किसी बात पर मुझसे इतनी नाराज हो गई कि करीब सालभर बातचीत तक नहीं की। मैं फोन करती तो वह मुझसे बात नहीं करती थी। मुझे पता चला कि किसी ने उसे मेरे खिलाफ झूठ बोलकर भड़का दिया था। मैं क्षमावाणी पर्व पर सीधे उसके घर पहुंची और मिच्छामी दुक्कड़म का महामंत्र चलाया। इस बीच उसे भी गलती का अहसास हुआ, इसके बाद तो करीब पांच सालों से हम रोज ही मिलते हैं।
..तो बुरी को क्यों याद रखें
हम दो भाई हैं लेकिन पारिवारिक विवादों की वजह से बहुत समय से बातचीत बंद थी। एरोड्रम रोड निवासी जीतू सोनी कहते हैं बड़े भाई ने विवाद को भूलते हुए अपनी बेटी की शादी में मुझे न्योता भेजा लेकिन उनके कहे गए बुरे शब्द मुझे बार-बार याद आ रहे थे इसलिए मैं जाना नहीं चाहता था। मेरी पत्नी ने उस वक्त मुझे समझाया पयरुषण में हमें अहंकारों को छोड़ने को कहा जाता है और क्षमा करने वाला महान होता है। भाई और आपका रिश्ता कभी अच्छा था लेकिन जब आपको उनकी अच्छी बात याद नहीं आ रही तो बुरी बातों को क्यों याद रख रहे हैं। उस सीख ने मेरी जिंदगी बदल दी।
..और अपनी भी गलती का अहसास हुआ
पयुर्षण में दस प्रमुख धर्म में उत्तम क्षमा महत्वपूर्ण है जिसका मतलब है कि दूसरों पर क्रोध न करते हुए उनकी गलती के लिए उन्हें माफ करना लेकिन इसे आत्मसात करना बड़ा मुश्किल है। सीए खुशबू जैन कहती हैं कुछ साल पहले पयुर्षण के समय मेरे भाई ने मेरी किताब भूल से रद्दी समझकर बेच दी, जबकि वह बहुत महत्वपूर्ण थी। मैंने गुस्से में उससे बात करना छोड़ दी। भाई ने मुझे दूसरी किताब लाकर दे दी फिर भी अकड़ में मैंने उससे बात नहीं की। अंतिम दिन क्षमावाणी पर जब मैंने प्रवचन के माध्यम से क्षमा का अर्थ समझा तब मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ और मैंने भाई से अपने गुस्से के लिए क्षमा मांगी।
रिश्तों को जोड़ा पयरुषण ने
आड़ा बाजार निवासी मोना सुराणा कहती हैं मेरी एक सहेली थोड़े नीचे तबके की थी। स्कूल में एक बार हमारी किसी बात पर बहस हो गई और जाने-अनजाने मैंने उसे नीचे तबके का दर्शाया। उसे बहुत दु:ख हुआ और फिर उसने मुझसे बात करना छोड़ दी। पढ़ने में वह बहुत अच्छी थी और हमेशा मेरी मदद भी करती थी इसके बावजूद मैंने उसके साथ गलत व्यवहार किया। क्षमावाणी आने पर मैंने उसके घर जाकर इस बात के लिए माफी मांगी।
वैष्णव स्कूल में आज 22 तपस्वियों का सम्मान होगा
इंदौर. श्वेतांबर जैन समाज का सामूहिक क्षमावाणी कार्यक्रम रविवार सुबह 9.30 बजे वैष्णव स्कूल हॉल में आयोजित किया जाएगा। अखिल भारतीय श्वेतांबर जैन महासंघ, जैन श्वेतांबर सोशल ग्रुप फेडरेशन और केंद्रीय श्वेतांबर जैन महिला संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में 22 मास खमण तपस्वियों का सम्मान किया जाएगा। डॉ. प्रकाश बांगानी, महासचिव यशवंत जैन, सुषमा जैन, संतोष मामा ने बताया समारोह में श्वेतांबर मूर्तिपूजक, स्थानकवासी और तेरापंथी समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया है।
श्रीसंघ का सामूहिक क्षमावाणी आज
श्री चिंतामणि पाश्र्वनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर, महावीरबाग में 7 सितंबर को सुबह 9.30 बजे से सामूहिक क्षमावाणी व स्वामी वात्सल्य का आयोजन होगा। श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ श्रीसंघ के अध्यक्ष छगनराज हुंडिया ने बताया इस मौके पर साध्वी विनीताश्रीजी, विमलयशाश्रीजी, पद्मयशाश्रीजी, पूर्णयशाश्रीजी, जिनाज्ञाश्रीजी, आत्मनिधिश्रीजी, सौम्यनिधि म.सा. व जिनशिशु प्रज्ञाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा-5 के सान्निध्य में अनेक धार्मिक आयोजन भी होंगे।