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परिवार ने लिया देहदान का व्रत

जयपुर. सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में शनिवार को पुखराज सालेचा के पुत्र नरेश व अनिल सहित पूरे परिवार ने देहदान करने की बात कही और किसी भी स्थान पर मृत्यु होने पर पास के मेडिकल कॉलेज में देह का दान करने की घोषणा की।

इससे पूर्व श्रीमती प्यारीदेवी सालेचा (92) की शुक्रवार को हुई मौत के बाद परिजनों ने उनके शव को शनिवार को एसएमएस मेडिकल कॉलेज को सुपुर्द कर दिया। प्यारी देवी ने मृत्युपरांत देहदान करने के लिए कहा था।

एक साल पहले प्यारीदेवी के पुत्र रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पुखराज सालेचा की पत्नी ने भी मृत्यु के बाद देहदान किया था। एक साल के अंतराल पर सास-बहू के देहदान का यह अनूठा उदाहरण है। शनिवार को परिवार व रिश्तेदारों ने बैंड-बाजे के साथ मेडिकल कॉलेज टीम के सदस्य डॉ.जगदीश चौधरी, डॉ.आर.एस.मित्तल को प्रात: 10 बजे श्रीमती प्यारी देवी की देह को सुपुर्द किया। इस अवसर पर राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जसराज चौपड़ा सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सालेचा परिवार की ओर से देह दान के लिए आगे आने पर इससे अन्य लोग भी प्रेरित होंगे। मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों को अध्ययन में सुविधा मिल सकेगी।
—डॉ.अशोक पानगड़िया, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज

देहदान की शुरुआत
फांसी की सजा पाने वाले कैदी बाबा बालयोगी अवधूत ने अपनी आखिरी इच्छा देहदान की जाहिर की थी और लिखित में जेल प्रशासन को शव को किसी भी मेडिकल कॉलेज को देने का आग्रह किया तो जेल अधिकारियों ने देहदान किया।

यह प्रक्रिया है देहदान की
देहदान का शपथ पत्र मेडिकल कॉलेज में निशुल्क उपलब्ध है। कानूनी उत्तराधिकारी का अनापत्ति प्रमाण पत्र दस रुपए के नॉन ज्यूडिशियल स्टॉम्प पर संभागीय दंडनायक से सत्यापित कराकर देहदान का शपथ पत्र फॉर्म के साथ संलग्न करके एक प्रति मेडिकल कॉलेज दूसरी संबंधित थाने और तीसरी स्वंय के पास रखनी होगी।

देहदान करने वालों की संख्या
देहदान करने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। 1988 में जहां देहदान करने वाले की संख्या एक थी, वहीं 2007 में बढ़कर छह हुई। इस साल मेडिकल कॉलेज में 6 सितंबर 2008 को स्व.प्यारी देवी का मृत्यु के बाद देहदान हुआ। निजी मेडिकल कॉलेज में पिछले माह मृत्यु के बाद स्व. आनंद किशोर माथुर के परिजनों ने देहदान किया।





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