जयपुर. सेना ने जिस व्यक्ति को स्पेशल कमांडो बनाकर देश की रक्षा करने का जिम्मा सौंपा, उसी कमांडो को जुए की लत ने शातिर बैंक सेंधमार बना दिया। सेना से फरार होकर उसने सात माह में ही नौ वारदातों को अंजाम दिया।
इंडियन ओवरसीज बैंक, जयपुर में सेंधमारी का मुख्य सरगना अनिल कुमार सिंह शुक्रवार रात भिवाड़ी से जम्मू भागने की तैयारी में था, जिसे जयपुर पुलिस ने दबोच लिया। अनिल को द. अफ्रीका के इथोपिया और इविटोरिया के बीच चल रहे गृह युद्ध में भारत की ओर से शांति सेना का सदस्य भी बनाकर भेजा गया था।
पुलिस ने बताया कि आरोपी हरियाणा के सावड़ गांव का रहने वाला है। वह वर्ष 2000 में सेना में भर्ती हुआ था। इसके बाद पांच साल तक जम्मू कश्मीर में तैनात रहा। आरोपी को पूछताछ के लिए पांच दिन के रिमांड पर लिया गया है।
दूसरे सर्वश्रेष्ठ कमांडो दल का सदस्य
आरोपी ने बताया कि वह 9वीं पैरा स्पेशल फोर्स का स्पेशल कमांडो था। इस दल की गिनती इजरायल के बाद दुनिया के दूसरे सर्वश्रेष्ठ कमांडो दल के रूप में होती है। अनिल का 2006 में जम्मू कश्मीर से आगरा ट्रांसफर हुआ था। यहां उसे वर्ष जनवरी 07 में उसके साथी के एटीएम कार्ड के नंबरों का पता चलने पर उसने डेढ़ लाख रु. निकलवा लिए।
जानकारी मिलने पर साथी ने शिकायत की। कार्रवाई के भय से अनिल सेना छोड़कर भाग आया। उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। इसके बाद वह लगातार जुए में हारता गया। रुपयों की जरूरत होने पर वह हरियाणा के ही बदमाशों के साथ मिलकर वारदात करने लगा।
चोरी में सेना का प्रशिक्षण काम आया
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि स्ट्रांग रूम के दरवाजे को वह अकेला ही काटता था। इसे काटने के लिए 1600 डिग्री तापमान और स्पेशल कपड़ों की जरूरत होती है। इसके लिए उसे सेना में मिला प्रशिक्षण काम आया।
बैंक तिजोरी पर मिल गई थी बैलेंस शीट : आरोपी ने बताया कि जब उसने पहला लॉकर तोड़ा तो उसमें काफी जेवरात मिले। इसके बाद सात लॉकर तोड़े लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। बाद में बैंक तिजोरी के पास गया तो वहां बैलेंस शीट मिल गई, जिसमें तिजारी में 9 लाख 81 लाख रुपए की जानकारी थी। जिस पर उसने तिजोरी तोड़ दी, इसमें उसे 7 लाख 28 लाख रुपए मिले। तिजोरी का दूसरा हिस्सा तोड़ता उससे पहले ही गैस खत्म हो गई।