जयपुर.
रुमानी गजलों के अजीम फनकार पंकज उधास की आंखें शनिवार को अपना चर्चित गीत ‘चिट्ठी आई है’ सुनाते-सुनाते नम हो गई। अवसर था दैनिक भास्कर के सहयोग से बचपन बचाओ आंदोलन और मैडले की ओर से बिड़ला सभागार में आयोजित उनके कार्यक्रम का।
इंटरवल के बाद श्रोताओं की फरमाइश पर उन्होंने यह गीत जयपुर के शहीद अभिमन्यु सिंह को समर्पित किया। गीत सुनाने के दौरान पंकज इसके भावों में ऐसे खोए कि गाते-गाते उनकी आंखों से आंसू टपक पड़े।
बड़ी मुश्किल से आंसुओं पर काबू पाते हुए उन्होंने श्रोताओं से कहा कि पिछले पंद्रह सालों में पहली बार इस रचना पर मैं इतना जज्बाती हुआ हूं। इस पर सभागार में बैठे श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनके इन जज्बातों की कद्र की।
श्रोताओं से खचाखच भरे सभागार में जैसे ही पंकज मंच पर आए लोगों ने तहे दिल से तालियां बजाकर उनका अभिवादन किया। बैठते ही सभागार से उनकी हिट गजलों की फरमाईश शुरू हो गई।
शुरुआत उन्होंने अपने एलबम शीशा की एक गजल से किया। उसके बाद उन्होंने निकलो ना बेनकाब जमाना खराब है, जियें तो जियें कैसे बिन आपके, चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल, इक्कीसवीं सदी के हालातों पर जफर गोरखपुरी की लिखी रचना ओर आहिस्ता कीजिए बातें जैसी दिलकश रचनाएं पेश कीं। प्रस्तुति के दौरान पंकज श्रोताओं से आत्मीयता से बातचीत भी करते रहे।