नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि यदि किसी संयुक्त उपक्रम से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलता है तो राज्य के राजस्व में वृद्धि होती है तथा क्षेत्र के लोग समृद्ध होते हैं तो इसके लिए भूमि का अधिगृहण लोकहित के समान माना जाएगा।
न्यायमूíत सी. के. ठक्कर और न्यायमूर्ती डी.के. जैन की पीठ ने आंध्र प्रदेश में भूमि अधिगृहण का विरोध कर रहे लोगों की अपील को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा यदि किसी परियोजना से बड़ी संख्या में आम लोगों को फायदा पहुंचता है तो उसे लोकहित की पूर्ति की तरह विकास परियोजना के रूप में देखा जाना चाहिए।
पीठ ने यह भी कहा कि भूमि का अधिगृहण लोकहित में है या नहीं इसका फैसला करने के लिए सरकार ही सबसे उपयुक्त एजेंसी है। पीठ ने यह भी कहा कि ढांचागत विकास के लिए निजी क्षेत्र के सहयोग से संयुक्त उपक्रम लगाने के महत्व को विदेशों में भी स्वीकार किया गया है।