झज्जर (राजस्थान).दिल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नालॉजी (निफ्ट) के छात्रों ने परंपरागत कुम्हारों केहुनर को ब्रांड के रूप में स्थापित करने का बीड़ा उठाया है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मांग के मुताबिक मिट्टी के उत्पादों के नए डिजाइन तैयार करने के लिए यहां एक वर्कशाप आयोजित की गई है।
वर्कशॉप में एसेसरीज डिजाइनिंग के ये छात्र यहां के कुम्हारों के साथ मिलकर नए डिजाइनों पर आधारित सजावटी वस्तुओं के अलावा अन्य चीजों को भी तैयार करने में जुटे हैं।
इस संबंध में वर्कशॉप में भाग ले रहे छावनी मोहल्ले के कृष्ण खोहाल ने बताया कि मिट्टी को मनचाही आकृति देना उसके बाएं हाथ का खेल है, लेकिन इन चीजों की डिजाइन पर अगर खुद का अधिकार हो तो दस्तकारी का यह हुनर उद्योग-धंधे का रूप ले सकता है।
उधर, एसेसरीज विशेषज्ञ मुरूगन ने बताया कि डिजाइन पर खुद का अधिकार होने से ही बाजार में पहचान मिल सकती है। उनके अनुसार बौद्धिक संपदा का अधिकार (आईपीआर) उत्पाद को ब्रांड बनाने में काफी महत्वपूर्ण योगदान देगा।