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धीरूभाई की सफलता का राज डेप्रिशिएशन में था

अहमदाबाद. धीरूभाई अंबानी के भाई रमणीकभाई अंबानी का कहना है कि रिलायंस के आरंभिक दिनों में धीरूभाई खातों में डेप्रिशिएशन दिखाकर टैक्स बचाने में सफल रहे थे।

एजी कृष्णमूर्ति की किताब- ए स्टोरी आफ करेज, पर्सीवरेंस एंड होप के विमोचन समारोह में रमणीकभाई ने बताया कि आरंभिक दौर में वे लोग किस तरह मशीनों और संपत्तियों का डेप्रिशिएशन करके लाभ में आए थे। रमणीकभाई ने बताया कि मुकेश अंबानी मोबाइल व्यवसाय के समय कुछ छोटी गलतियां कर बैठे तो धीरूभाई परेशान हो गए थे।

धीरूभाई का साफ कहना था कि मोबाइल की दरें पोस्टकार्ड के बराबर होनी चाहिए यानी 40 पैसे प्रति मिनट। उस समय मोबाइल कंपनियां 18 रुपए प्रति मिनट वसूलती थीं और धीरूभाई इसे अनुचित मानते थे।

कृष्णमूर्ति की इस किताब में धीरूभाई के साहस, लगन और समाज पर उनके असर का जिक्र किया गया है। कृष्णमूर्ति ने डीएनए को बताया कि यह किताब धीरूभाई द्वारा अपनाई गई व्यवसाय पद्धतियों (बिजनेस प्रोसेस) के बारे में विस्तार से बताती है।

धीरूभाई ने ऐसे कई बदलाव किए जो आज भी लाभकारी हैं। जैसे रिलायंस कम्युनिकेशंस ने मोबाइल फोन की दरें घटाईं, जिसके कारण साधारण आदमी भी मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा है।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि उन्होंने 26 साल तक साथ काम करके धीरूभाई का असर देखा है। उन्होंने धीरूभाई के भाई से भी सूचनाएं हासिल कीं। कुछ जानकारियां इंटरनेट से जुटाई हैं। कृष्णमूर्ति ने धीरूभाई अंबानी पर यह दूसरी किताब लिखी है। अब वह तीसरी किताब लिखने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी किताब भी हिंदी, मराठी, उड़िया, बंगला और मलयालम में छपकर आने वाली है।





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