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वित्तीय योजना न बनाईं तो पछताओगे

मुंबई. देश में बह रही बयार युवाओं के लिए शुभ संकेत है। उपभोक्ता के तौर पर कभी भी युवाओं को इससे बढ़िया वस्तुएं व सर्विस नहीं मिलीं। कमाई के हिसाब से फलती-फूलती अर्थव्यवस्था को देखते हुए इससे बढ़िया अवसर नहीं मिल सकता। इसीलिए, युवा खूब कमा रहे हैं व जमकर खर्च कर रहे हैं।

भविष्य के लिए प्लानिंग : कॉलेज स्टूडेंट के तौर पर आपको अपनी पढ़ाई के साथ-साथ फाइनेंशियल प्लानिंग की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। अगले हफ्ते के पिज्जा फंड की फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए नहीं बल्कि अपने भविष्य की फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए। अपनी कॉलेज लाइफ में ही इस बात को यकीनी बना लेना चाहिए कि पढ़ाई खत्म होने के बाद आप अपने भविष्य में किस पथ पर चलेंगे। युवाओं की आयु कम होने के कारण वे दूसरों से बढ़िया होते हैं। दूसरे शब्दों में युवा निवेशक के पास अन्य निवेशकों से ज्यादा समय होता है। इससे युवा निवेशकके निवेश संबंधी निर्णय लेने में ज्यादा तरलता आती है।

कम्पाउंडिंग का जादू: यदि हम एक उदाहरण लें जिसमें युवा 500 रु. प्रति माह के हिसाब से निवेश करे, तो उसे कितना लाभ हो सकता है। यह कम्पाउंडिंग की सहायता से ही समझा जा सकता है

फाइनेंशियल प्लानिंग अपनाएं युवा : भारत में युवाओं की जनसंख्या अन्य देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। गत कई वर्षो से भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी छाई हुई है, इससे लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आने लगा है। युवा भविष्य की योजनाओं को पूरा करने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग का रास्ता अपना सकते हैं। उनके पास पूरा जीवन होता है और रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करने का भी समय होता है।

ज्यादातर लोगों के सामने यह समस्या आती है कि वे कोई प्लानिंग नहीं करते हैं। कुछ लोग जिनके पास बहुत अच्छी सैलरी होती है और बहुत ज्यादा सेविंग होती है वह भी बिना किसी प्लानिंग के ही निवेश कर देते हैं। युवाओं के पास निवेश के लिए बहुत से ऑप्शन होते हैं जैसे कि स्माल सेविंग स्कीम, इक्विटी, म्यूचुअल फंड, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान इत्यादि।

कैसे करें प्रोडक्ट का चुनाव : आज के युवाओं को चाहिए कि वह सारे समय सही निवेश की सलाह देने वाले के साथ ही जुड़े रहें। फाइनेंशियल मार्केट बहुत ज्यादा पेचीदा है और यहां निवेश के लिए बहुत सारे प्रोडक्ट मौजूद हैं।

प्रोडक्ट का चुनाव निम्न बातों पर निर्भर करता है:

>> निवेशक की आयु।
>> कितने लंबे समय तक निवेश करना है।
>> निवेशक की रिस्क लेने की क्षमता।
>> निवेशक की जरूरत।

एक पुरानी विधि के अनुसार एक निवेशक को 100 में से अपनी आयु घटाकर उतना इक्विटी में व बाकी डेब्ट फंड में निवेश करना चाहिए। इसमें से भी पहले लिक्विड फंड या कैश के रूप में इमरजेंसी की खातिर पैसा रख लेना चाहिए। एक व्यक्ति को घर खरीदने के लिए भी प्लान बना लेना चाहिए।

यदि किसी युवा के पास ज्यादा रिस्क लेने की क्षमता है व ज्यादा समय है उसे इक्विटी में ज्यादा निवेश करना चाहिए। जब कोई व्यक्ति काम की शुरूआत करता है उसकी इनकम कम होती है व जरूरी खर्च निकालने के बाद उसके पास बहुत तम पैसा बचता है। प्रत्येक युवा जल्द से जल्द अमीर बनना चाहता है। हर महीने अगर थोड़ा-थोड़ा निवेश अनुशासन के साथ सिस्टेमेटिकली किया जाए तो लंबे समय में बहुत ज्यादा पैसा एकत्रित हो सकता है।

15 प्रतिशत की दर से 2,000 रुपए निवेश से 37 वर्ष में 3,96,06,204 पाएं: कोई युवा (23 साल) अगर 60 साल तक प्रति महीने 2,000 रुपए निवेश करता रहे तो उसके पास 15 प्रतिशत सालाना ब्याज की दर से 3,96,06,204 रुपए हो जाएंगे। इस केस में सेलरी में वृद्धि से निवेश में होने वाली वृद्धि को शामिल नहीं किया गया है। युवा निवेशकों को पहले अपने निवेश का विनियोजन कर लेना चाहिए कि इक्विटी, डेब्ट व लिक्विड एसेट में कितना निवेश करना है। युवाओं को इन सब पर गौर करने के बाद ही प्रोडक्ट का चयन करना चाहिए।





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