नई दिल्ली/भोपाल. करार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परमाणु बिजली मिलने में चार से पांच वर्ष तक का समय लग सकता है। अमेरिका, फ्रांस व रूस के सहयोग से परमाणु रिएक्टर स्थापित करने के लिए डील की औपचारिकता बाकी है।
शुरू में तीनों देशों को दो-दो रिएक्टरों का ठेका दिया जा रहा है। संभावना है मप्र के जबलपुर या करार के विरोधी वाममोर्चा के गढ़ पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में रिएक्टर लगाने का काम अमेरिकी कंपनी को मिले।
इन दो में से किसी एक जगह का चयन किया जाना है। करार के रणनीतिकारों में से एक तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने विशेष बातचीत में यह बात कही। अब चौबीस साल पहले शुरू हुई और तीन साल से केंद्र सरकार के ठंडे बस्ते में बंद मध्यप्रदेश में परमाणु पावर हाउस स्थापित करने की कवायद अब नए सिरे से शुरू होने की उम्मीद है।
शिवपुरी में पसंद कर ली गई थी जमीन
मध्यप्रदेश में पहला न्यूक्लियर पावर स्टेशन लगाने के लिए शिवपुरी जिले के भीमपुर गांव में जगह पसंद कर ली गई थी। राज्य बिजली बोर्ड ने जियोलाजिक, ड्रिलिंग डेटा और सर्वे रिपोर्ट तीन साल पहले न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन को भेज दी थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रोजेक्ट लगाने के लिए पत्र लिख चुके हैं। इस परमाणु बिजलीघर की क्षमता दो हजार मेगावाट और लागत आठ हजार करोड़ रुपए होगी।
मध्यप्रदेश में परमाणु बिजलीघर लगाने की बात 24 साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन 1986 के अप्रैल में सोवियत संघ (यूक्रेन) के चेरनोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट में हुए हादसे के बाद 14 साल तक मप्र में एटामिक पावर प्लांट लगाने की योजना ठंडे बस्ते में ही रही। वर्ष 2000 केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने कमेटी बनाई। इसे प्लांट लगाने स्थान का चयन करना था। यह काम 2001 में शुरू हुआ।
मंडला जिले के चुटका तथा शिवपुरी जिले के राजापुर गांव में सर्वे किया गया, लेकिन न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन ने चुटका को पर्यावरण की दृष्टि से खारिज कर दिया, जबकि राजापुर में डेम बनाने की जरूरत थी, जो नहीं हो सका। इस फरवरी 2005 में शिवपुरी जिले के भीमपुर गांव को चुना गया। यहां मड़िखेड़ा बांध मौजूद है, जिससे नया बांध बनाने की जरूरत नहीं होगी। यहां राज्य बिजली बोर्ड ने ड्रिलिंग सर्वे तथा जियोलाजिक सर्वे किया।
इसकी रिपोर्ट 31 अगस्त 2005 तक कारपोरेशन को भेजी जाना थी। मुंबई में बाढ़ की वजह से नवंबर 2005 में यह रिपोर्ट भेजी गई थी। जो केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को भेज दी गई थी। तब से भीमपुर में परमाणु बिजलीघर लगाने का मामला केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय में ठंडे बस्ते में है। इस दौरान मप्र के दौरे पर आए ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे आश्वासन दे चुके हैं कि प्रदेश में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट लगाया जाएगा।
ईधन की समस्या से अटका था मामला
प्रदेश के ऊर्जा महकमे के आला अफसरों का कहना है कि भीमपुर की साइट तो तय हो चुकी है, लेकिन मामला परमाणर्ु ईधन की कमी पर अटका था, अब अगर केंद्र सरकार को ईधन मिलने की राह आसान हो सकी तो मप्र में भी बिजली संकट का प्रभावी हल यह पावर हाउस लग पाएगा। लेकिन तो उम्मीद ही की जा सकती है, भरोसा नहीं।
परमाणु बिजलीघर की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना
भोपाल. न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) द्वारा भारत को परमाणु व्यापार की छूट देने के साथ ही न्यूक्लियर पावर कापरेरेशन (एनपीसी) और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लि. (भेल) द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किए जाने वाले परमाणु बिजली घर की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।
बिजली घर किस तकनीक का स्थापित किया जाए इसके लिए टेंडर हो चुके हैं।एनपीसी और भेल के बीच संयुक्त रूप से परमाणु बिजलीघर बनाने के लिए करार हो चुका है। इसके लिए संयुक्त क्षेत्र की कंपनी बनना है जिसका नाम अभी तय नहीं हुआ है।
ईंधन की आपूर्ति की अड़चन के कारण प्रक्रिया तेज गति से नहीं चल पा रही थी। भेल के सूत्रों के अनुसार एनएसजी की हरी झंडी के बाद ईंधन आपूर्ति का रास्ता साफ होने से निश्चित रूप से अब इस दिशा में गति आएगी। इसके संकेत भी मिल चुके हैं। उम्मीद है कि महीनेभर के अंदर संयुक्त क्षेत्र की कंपनी की घोषणा हो जाए। बीएचईएल भोपाल के कार्यपालक निदेशक आरके सिंह के अनुसार स्थापित होने वाले परमाणु बिजलीघर की तकनीक के लिए ज्वाइंट टास्क फोर्स द्वारा अभिरुचि के आमंत्रण की सूचना जारी की जा चुकी है।
कहां लगेगा बिजलीघर : एनपीसी और भेल द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किए जाने वाला परमाणु बिजलीघर कहां बनेगा, यह अभी तय नहीं है। सूत्रों के अनुसार इसका निर्णय राष्ट्रीय महत्व के आधार पर लिया जाएगा। संभावना है कि प्राथमिकता पूर्वी क्षेत्र को दी जाए क्योंकि इस क्षेत्र में बिजली का उत्पादन कम है। प्लांट देश में कहीं भी स्थापित हो कंपनी का मुख्यालय भोपाल में ही रहने की संभावना है। भेल का मुख्यालय दिल्ली में है और एनपीसी का मुंबई में। दोनों के लिए भोपाल बेहतर रहेगा।