इंदौर. जुलाई के दंगों को पुलिस-प्रशासन और विश्व हिंदू परिषद की शह थी। प्रशासन की भूमिका दंगों का आधार थी। उसके डेढ़ महीने बाद तक एक भी गिरफ्तारी न होना इसका सबूत है। पुलिस ने हवाई फायर के बजाए सीधे लोगों को निशाना बनाया। दो की शाम और तीन जुलाई की सुबह कलेक्टर-एसपी आरएसएस कार्यालय भी गए थे।
ये तथ्य प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह और गृहमंत्री शिवराज पाटिल को सौंपी गई रिपोर्ट में बताए गए हैं। रिपोर्ट केंद्र सरकार द्वारा दंगों की जांच के लिए तीन अगस्त को भेजी गईं राष्ट्रीय योजना आयोग की सदस्य सईदा हामिद और राष्ट्रीय एकता परिषद की सदस्य शबनम हाशमी ने तैयार की है। उन्होंने राज्य शासन, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और दंगे के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की है।
जांच दल ने जूना रिसाला, सिंधी कॉलोनी और खजराना में पीड़ित परिवारों से भेंट की। साथ में कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव, एसपी आरके चौधरी और एडीएम रमेश भंडारी से भी मिला था।
कई मुख्यमंत्रियों ने लिखा शिवराज को पत्र
यह रिपोर्ट पढ़ने के बाद कई मुख्यमंत्रियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को पत्र भी लिखे। इनमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, आंध्रप्रदेश के वाय.डी. राजशेखरन रेड्डी, दिल्ली की शीला दीक्षित और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत शामिल हैं।
कलेक्टर-एसपी नहीं दे पाए जवाब
रिपोर्ट के मुताबिक कलेक्टर-एसपी दो वर्ष में दो हजार शस्त्र लाइसेंस क्यों जारी किए? इसका जवाब नहीं दे पाए।
शासन की बड़ी लापरवाही
रिपार्ट के मुताबिक इंदौर जैसे बड़े शहर में शासन ने कलेक्टर-एसपी एकसाथ बदलकर बड़ी लापरवाही की। दोनों दंगों से करीब एक महीने पहले ही आए थे। एसडीएम, सीएसपी और थाना प्रभारी भी नए थे। दंगों के बाद पुराने थाना प्रभारियों को अस्थायी तौर पर बुलाया गया।
सिफारिशें ये भी
>> इंदौर की सांसद, प्रभावित क्षेत्रों के विधायक और आरएसएस नेताओं के खिलाफ एक्शन ली जाए।
>> सीधी फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मियों को निलंबित करें।
>> घायलों को एक्सपायरी डेट की दवाइयां देने वाले डॉक्टरों को पहचानकर आपराधिक प्रकरण दर्ज करें।
>> 3-4 जुलाई की घटनाओं की जांच हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कराएं।
>> प्रभावित परिवारों को पुर्नवास पैकेज और बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा का इंतजाम हो।
>> मध्यप्रदेश पुलिस को भारतीय संविधान, लोकतंत्र, सांप्रदायिकता का पाठ पढ़ाएं।
>> इंदौर बंद को रेपिड एक्शन फोर्स ने भी सपोर्ट किया था।
>> कई लोगों को सिमी के नाम पर निशाना बनाया गया। इसमें पुलिस-प्रशासन भी भागीदार रहा।