जयपुर. पेट्रोल पर टैक्स नहीं घटने से उपभोक्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं, जबकि डीजल पर टैक्स में मामूली कटौती से पेट्रोल पंप संचालकों व ट्रांसपोर्टरों में आक्रोश है। पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन का कहना है कि जब तक डीजल की कीमत पड़ोसी राज्यों से कम या उसके आसपास नहीं होगी, तब तक राज्य सरकार को घाटा ही रहेगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनीत बगई ने बताया कि सरकार को डीजल पर 60 पैसे की टैक्स कटौती से लगभग 200 करोड़ रुपए का सालाना नुकसान होगा। यदि सरकार यह कटौती ढाई रुपए तक करती तो डीजल की खपत 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाती।
सरकार को वर्तमान में 20 प्रतिशत टैक्स से 1698 करोड़ रुपए का सालाना राजस्व मिल रहा है। यदि इसे घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया जाता तो 25 प्रतिशत बढ़ी बिक्री के हिसाब से 1752 करोड़ रुपए सालाना फायदा होता। इस बढ़े हुए राजस्व के आधार पर पेट्रोल पर टैक्स की दर कम से कम 1 रुपए की कमी की जा सकती थी।
दोहरा नुकसान
राजस्थान टैंकर्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शीशराम चौधरी का कहना है कि यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इससे सरकार को दोहरा नुकसान है। यदि सरकार हरियाणा के बराबर भी कीमत कर देती, तो जितना राजस्व का नुकसान कीमतें कम करने में होता, उससे दोगुना राजस्व सरकार को प्राप्त हो सकता था। यह निर्णय न्यायोचित नहीं है।
टैक्स कम करने का कोई फायदा नहीं
जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाशचंद खंडेलवाल का कहना है कि टैक्स 60 पैसे कम करने से कोई फायदा नहीं है और हमें पड़ोसी राज्यों से डीजल खरीदना ही पड़ेगा। हम मुख्यमंत्री से फिर मुलाकात करेंगे।
उपभोक्ताओं के साथ धोखा
सरकार ने रसोई गैस पर टैक्स तो कम कर दिया, लेकिन पेट्रोल में कोई राहत न देकर उपभोक्ताओं के साथ धोखा किया है। मालवीय नगर निवासी राधेश्याम शर्मा ने कहा कि पेट्रोल पर 28 प्रतिशत टैक्स किसी भी सूरत में न्याय संगत नहीं है।
वैसे तो अधिकतम वैट दर यानी साढ़े 12 प्रतिशत तक की जानी चाहिए। फिर भी अगर यह संभव नहीं हो तो 20 प्रतिशत ही की जाए, ताकि कुछ राहत मिल सके। रेडीमेड व्यवसायी संजय गुप्ता का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार से जूझ रहे उपभोक्ताओं को आस थी कि सरकार ऐसा निर्णय करेगी, जिससे उन्हें कुछ राहत मिलेगी, लेकिन उनकी आस टूट गई है। अब इस सरकार से उम्मीद लगाना बेकार है।