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मारवाड़ियों ने गोद लिए बिहार के 30 गांव

झुंझुनूं. bihar प्रवासी मारवाड़ियों ने कोसी के कहर से बर्बाद हुए बिहार के तीस गांवों को गोद लेकर पुनर्वास का संकल्प लिया है। ये वहां वर्षो से बसे वे ही राजस्थानी हैं जिन्हें ‘बिहार के शोक’ ने शोक में डुबो दिया है।

इस विभीषिका में इनका जमा-जमाया कारोबार बर्बाद हो गया है। खुद उनके परिवार वहां बाढ़ में फंसे हैं, मगर वे वहां के लोगों की जान बचाने में सबसे आगे हैं। सेवा कार्यो में मारवाड़ी संगठनों में सबसे अग्रणी भूमिका मारवाड़ी युवा मंच की है।

बिहार से मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी मिश्रा ने ‘भास्कर’ को फोन पर बताया कि उन्होंने पहले चरण में 30 गांवों को गोद लेकर उनके पुनर्वास का संकल्प लिया है। प्रभावितों को भोजन, आवास और अन्य सुविधाएं जुटाने के लिए मंच कार्यकर्ता स्थानीय लोगों की मदद में जुटे हैं।

हर दिन दोनों समय 50-50 हजार लोगों को खाना खिलाया जा रहा है। फिलहाल त्रिवेणीगंज, मधेपुरा, सुपोल और फारबिसगंज में मंच के स्थायी और अरड़िया, मुरलीगंज, कटिहार, किशनगंज, भागलपुर, नौगसिया, खरीक, छातापुर और सिंहसर में अस्थायी कैंपों में हजारों की तादाद में लोग सहारा लिए हुए हैं।

मधेपुरा : सेवा को आगे आए राजस्थानी
बिहार के मधेपुरा प्रवासी और सीकर निवासी आनंदकुमार प्राणसुखका अपने छोटे भाई मनीष और पत्नी रीता के साथ बाढ़ग्रस्त इलाके में ही डटे हए हैं। दोनों भाई यहां लगे शिविर में दिन-रात जुटे हैं। रीता बताती है कि दोनों भाई सुबह निकलते हैं जो रात को 11-12 बजे तक लौटते हैं।

(भास्कर ने फोन पर की ताजा हालात को लेकर इस परिवार से बात)

आनंद कुमार जी मधेपुरा में अब क्या हालात हैं?
-पूरा मधेपुरा तहस-नहस हो चुका है। अभी भी यहां काफी पानी है।
क्या लोग यहां से पलायन कर रहे हैं?
-यहां से करीब सवा सौ मारवाड़ी यहीं के दूसरे इलाके में पलायन कर चुके हैं।
राहत शिविरों की क्या स्थिति है?
-हमारे राहत शिविर में पांच हजार लोग रुके हैं। दिन रात उनकी सेवा कर रहे हैं।

कई परिवारों की आशा जुड़ी
आनंद प्राणसुखका के पिता योगेंद्रप्रसाद और मां संपतदेवी सहरसा में रुके हुए हैं। वे कहते हैं कि हमें बेटे-बहू की बहुत चिंता रहती है, लेकिन यह भी बड़ी बात है कि सेवा में जुटे हैं। वहां से पलायत कर चुके लोग उनसे ही हालात पूछते है। यही कहते आनंद बाबू आप ही संभालना। कई परिवारों की आशा उनसे जुड़ गई है।

त्रिवेणीगंज : ढाई हजार को दिया आसरा
बरसों पहले झुंझुनूं के नंदकिशोर-पवन चौखानी परिवार के सदस्य बिहार के त्रिवेणीगंज में शिफ्ट हो गए। मारवाड़ी युवा मंच की त्रिवेणीगंज इकाई का अध्यक्ष इसी परिवार के मनीष चौखानी ने परिवार के कुछ सदस्यों को तो मुजफ्फरनगर तो कुछ को कोलकाता रिश्तेदारों के यहां भेज दिया। अपने परिवार के लोगों से दूर मनीष वहीं रहकर सेवा कार्य में जुटे हैं।

(भास्कर ने फोन पर की मनीष चौखानी से बात)

मनीष जी राहत के लिए क्या प्रबंध हैं ?
-सरकारी प्रयास तो ऊंट के मुंह में जीरे से भी कम है। मारवाड़ी युवा मंच ने यहां राहत शिविर लगाया है।
इस शिविर में कितने लोग रुके हैं?
-छातापुर प्रखंड की सभी पंचायतों, त्रिवेणीगंज की 17 और मधेपुरा की कुछ पंचायतों के ढाई हजार से अधिक लोग आसरा लिए हुए हैं।
इनके लिए क्या व्यवस्थाएं हैं?
-नाश्ता, खाना, रहना, पहनना और दवा आदि की व्यवस्था की गई है।

पूछ रहे हैं बेटे का हाल
मुजफ्फरनगर में रह रहे मनीष के पापा पवन और मम्मी सुमित्रा के अलावा बड़े पापा नंदकिशोर और बड़ी मम्मी देवादेवी हर दिन सुबह-शाम फोन कर क्षेत्र के हालात तो पूछते ही है। उन्हें अपने बेटे की चिंता तो है लेकिन गर्व भी।

सेवा कैंपों में गूंजी किलकारियां
कयामत में भी जिंदगी रुकती-थमती नहीं। कुछ ऐसा ही बाढ़ग्रस्त बिहार में हो रहा है। जैसे ही कोई बच्चा पैदा होता है सब दुख भूलकर सेवा शिविर में रहने वालों के चेहरों पर खुशी छा जाती है।

बच्चे के जन्म पर किए जाने वाले सारे नेगचार कैंपों में रहने वाले लोग मिलजुल कर रहे हैं। अकेले मारवाड़ी युवा मंचों के कैंपों में सात डिलीवरी की अधिकृत सूचना मिली है। जिसमें त्रिवेणीगंज में चल रहे शिविर में छह और फारबिसगंज के शिविर में एक डिलीवरी हुई है।





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