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आदिवासी मुख्यमंत्री के लिए हल्ला

रायपुर. sibu रविवार को आदिवासी बचाओ आंदोलन के सम्मेलन में झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री के लिए लड़ाई छेड़ने का आह्वान किया। उन्होंने दलित-पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को भी एक मंच पर आकर शोषण और अन्याय के खिलाफ ताकत झोंकने को कहा।

पहली बार एक मंच पर आए आदिवासी और सतनामी समाज के इस आयोजन में श्री सोरेन ने कहा कि शोषण और अन्याय के खिलाफ लड़ाई केवल सत्ता प्राप्त कर ही जीती जा सकती है, इसलिए अपनी ताकत पहचान कर आदिवासी मुख्यमंत्री के लिए जुटना होगा।

सम्मेलन में सतनामी समाज के धर्मगुरू बालदास भी मौजूद थे। श्री सोरेन ने कहा कि 29 सितंबर को दिल्ली में होने वाली महापंचायत में समाज का राजनैतिक और सांस्कृतिक भविष्य तय हो जाएगा। सभी को मालूम है, आदिवासियों की स्थिति आज क्या है। उन्हें अपनी जमीन और संस्कृति से हाथ धोना पड़ रहा है। छग में अब इसकी अति हो गई है। यहां तो छत्तीसगढ़ियों की ही इज्जत नहीं है। इसे विवाद का घर बना दिया गया है। आदिवासियों का मजाक उड़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यहां के लोग मेहनतकश और दयालु हैं। लेकिन यहां उन्नति कहां हुई? बड़े भवन तो बन गए, खेतों को क्या मिला? नहरें फूटी हुई हैं। यहां सब कुछ रहते हुए स्थानीय लोगों के पास कुछ नहीं है। श्री सोरेन ने कहा कि अपने हक के लिए अभी से तैयार हो जाएं। कहां जेल है, कितनी बंदूकें और गोलियां हैं, गिनती कर लें। क्योंकि हमें झारखंड भी कुर्बानियां देकर मिला। हमारे कई साथियों का खून बहा। आप नहीं जागे हैं इसलिए हार रहे हैं।

श्री सोरेन ने कहा कि अपनी संस्कृति और धरोहर की रक्षा भी आप करें। उन्होंने पूछा कि बूढ़ातालाब का नाम कैसे बदल दिया गया जबकि सदियों से यह आराध्य बूढ़ादेव के नाम था। उन्होंने कहा कि सलवा-जुडूम आदिवासियों की संस्कृति है। उसे शिविरों में कैद कर नहीं बचाया जा सकता। इसकी क्या गारंटी है वहां उन पर हमला नहीं होगा? उन्होंने आदिवासियों को पढ़ाई में भी आगे बढ़ने की नसीहत दी। उन्होंने भंडारपुरी को सम्मानजनक धरोहर और तपोभूमि बताते हुए कहा कि गुरु घासीदास ने सतनाम की शिक्षा दी, यानी सत्य बोलो। इसी मार्ग पर आगे चलना है।

धर्मगुरु बालदास ने इस मौके पर कहा कि इस आंदोलन में छत्तीसगढ़िया बचाओ भी जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार से पीड़ित सभी लोगों को चाहे वह आदिवासी, सतनामी, ओबीसी, अल्पसंख्यक आदि हो, एक मंच पर आ जाना चाहिए। उन्होंने सरकार को धन्यवाद दिया कि बोड़सरा कांड की वजह से उन्हें जेल में नहीं डाला जाता तो आज सभी को एकजुट होने का मौका नहीं मिलता। उन्होंने व्यवस्था में परिवर्तन का आह्वान करते हुए इसे छत्तीसगढ़ियों का अपमान और अस्मिता की लड़ाई बताते हुए कहा कि इसके लिए समूचा मानव समाज एक हो गया है। यह समय की मांग भी है। अब छत्तीसगढ़ को चारागाह समझ कर चरने नहीं दिया जाएगा। सतनामियों और छत्तीसगढ़यिों को लड़ाकर बाहरी लोग राज कर रहे हैं।

स्टेडियम के नामकरण का प्रस्ताव
गुरु बालदास ने परसदा में बने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का नामकरण गुरु घासीदास के नाम पर करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से हाथ खड़े करवाकर इसके लिए समर्थन मांगा। लोगों ने नारे लगाकर इसका समर्थन किया।

आदिवासी सीटें कम करने पर बिफरे
नेताओं ने परिसीमन की आड़ में विधानसभा और लोकसभा की आदिवासी सीटें को कम करने को षडयंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि बिलासपुर लोकसभा सीट सहित दलित और आदिवासियों की 13 सीटें विलोपित कर दी गईं। अब पूरे देश की निगाहें इस समाज पर है कि वह क्या करता है? सीटें कम करने का विरोध करते हुए दिल्ली तक चक्कर लगाए पर कुछ नहीं हुआ।

शामिल हुए
सम्मेलन में गोंडवाना समाज समन्वय समिति बस्तर, कोयावासी क्रांतिसेना क्षेत्र बालमुखेड़ आदि संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

इन्होंने भी किया संबोधित
झारखंड के सांसद हेमलाल मुरमू, सतीश पेंदाम, बीडी मिंज, दिलीप चटर्जी, जीआर राणा आदि।

बालकृष्ण ने भी लिया आशीर्वाद
कभी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खास रहे बालकृष्ण अग्रवाल आज शिबू सोरेन की सभा में पहुंचे। उन्होंने बारी-बारी से श्री सोरेन और धर्मगुरु बालदास को हार पहनाकर स्वागत किया और पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। उल्लेखनीय है कि श्री अग्रवाल श्री जोगी से मतभेद के बाद बसपा में शामिल हो गए थे। बाद में उन्हें बसपा से भी निष्कासित कर दिया गया था।





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