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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. आईटीएम यूनिवर्स द्वारा इन दिनों ऊषाकिरण पैलेस में राष्ट्रीय कला समागम का आयोजन किया जा रहा है। इस कला समागम में देश के ख्यातिनाम चित्रकार शिरकत कर रहे हैं। जहां एक ओर यहां चित्रों की महफिल सजी है तो दूसरी ओर संगीत व नृत्य की सौंदर्यता भी बिखर रही है।
इसी कड़ी में रविवार को दिल्ली से र्आई किराना घराने की शास्त्रीय गायिका उमा गर्ग ने प्रस्तुति दी। उन्होंने राग शुद्ध कल्याण से अपने गायन की शुरुआत की। विलंबित लय में एक ताल में निबद्ध बंदिश प्रस्तुत की, जिसके बोल थे-‘रस भीनी भीनी आई, सब मिल मंगल गाएं..।’ उनकी दूसरी प्रस्तुति द्रुत लय में तीन ताल में निबद्ध एक बंदिश थी, जिसके बोल थे-‘मंडल बाजे रे..।’ उनकी आवाज में गजब की मिठास थी, जिसकी वजह से श्रोताओं के मुंह से अनायास ही वाह वाह निकल रहा था।
इसके बाद उन्होंने एक ठुमरी गाई, जिसके बोल थे-‘मोरे सैंया नहीं आए..।’ आखिर में उन्होंने मीरा का भजन गाकर अपने गायन को विराम दिया। उनके साथ तबले पर अख्तर हसन व हारमोनियम पर विनय मिश्रा ने संगत की। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ आईटीएम यूनिवर्स की चेयरपर्सन कनुप्रिया सिंह व डायरेक्टर रविंद्रप्रताप सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर आईटीएम यूनिवर्स के चेयरमैन रमाशंकर सिंह, हास्य-व्यंग्य कवि प्रदीप चौबे, वरिष्ठ रंगकर्मी कमल वशिष्ठ, पीएल गोहदकर, डा. रंजना टोणपे आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन आकांक्षा राजौरिया ने किया।
बढ़ रहे हैं सुनने वाले
दिन-प्रतिदिन शास्त्रीय संगीत सुनने वालों की संख्या बढ़ रही है। शास्त्रीय संगीत आज भी यथावत है, उसकी मिठास कभी खत्म नहीं हो सकती। यह कहना है शास्त्रीय संगीत गायिका उमा गर्ग का। वह कहती हैं कि यह बात ठीक है कि युवाओं का झुकाव पाश्चात्य संगीत की ओर हो रहा है, फिर भी शास्त्रीय संगीत पिछड़ नहीं सकता। नई पीढ़ी में इसके प्रति समर्पण है। वह पं. भीमसेन जोशी की शिष्या हैं।
कलाकारों की प्रशंसा हो रही है
पिछले पांच-दस सालों में माहौल बदला है। अब कलाकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और उन्हें प्रशंसा भी मिल रही है। कोलकाता से आए चित्रकार पार्थ प्रतिम देव कहते हैं कि अब कलाकारों की आर्थिक स्थिति सुधर रही है। उन्हें उनकी रचनात्मकता का उचित मूल्य मिल रहा है। कला से संदेश देने की बात पर वह कहते हैं कि यह पूरी तरह संभव नहीं होता। कई बार चित्रकार कुछ बनाता है और देखने वाला कुछ समझता है। वह जो बताता है, वह कलाकार स्वयं नहीं जानता। वह बताते हैं कि कई बार ऐसा हुआ, जब दर्शकों ने उन्हें पेंटिंग में कुछ चेंज करने को कहा और उन्होंने किया।
संतुष्टि कभी नहीं मिलती
कला समागम में असम से आए श्याम कानू कहते हैं कि कलाकार को कभी संतुष्टि नहीं मिलती। यदि वह संतुष्ट हो जाएगा, तो खत्म हो जाएगा। वह बताते हैं कि वह ज्यादातर ‘एनिमल फार्म’ थीम पर काम करते हैं। यह उनकी पसंदीदा थीम भी है। उन्हें एनर्जी और पावर पसंद है, जिसे चित्रों में भी स्थान देते हैं। उनके अनुसार अब कलाकारों को ग्लोबल व इंडियन मार्केट उपलब्ध हो रहा है, जिससे प्रत्येक कलाकार को काम व दाम मिल रहा है। आज सभी लोग व्यस्त हैं। पहले लोगों के पास फुर्सत होती थी। वह एक-दूसरे से मिल-जुल पाते थे और बातचीत कर पाते थे। आज युवा आर्ट कालेजों से बाहर निकलते ही व्यस्त हो जाते हैं।