अमृतसर. आने-जाने के लिए विमान, ठहरने के लिए फाइव स्टार होटल और हर शहर में नई कार..ये किसी बड़े कार्पेरेट सैक्टर के बड़े पद का विज्ञापन नहीं है।
ये पंजाब में सक्रिय लुटेरों की दिनचर्या का हिस्सा है, जिसका खुलासा हाल ही में 37 लाख रुपए की लूट के मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान हुआ है। हालांकि ये गिरोह भी किसी कार्पाेरेट की तरह ही अपने साथियों के परिवार की सुरक्षा की गारंटी देते हैं।
अगर कोई पकड़ा गया तो गिरोह उसके घर-परिवार की देखभाल करता है। सूत्रों के मुताबिक, भक्तांवाला स्थित एसबीआई बैक में 37 लाख की लूट के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी अमरजीत, देसराज, विजय पंजाबी, सुशील कुमार उर्फ सागर व संजय छोटू ने पूछताछ के दौरान कई सनसनीखेज खुलासे किए। उन्होंने बताया कि ये कांड उन्होंने अमृतसर के ही एक सरगना के कहने पर किया।
वह दिल्ली से विमान के जरिए ही अमृतसर आए थे और वापस भी इसी तरह दिल्ली चले गए। इसमें अमरजीत ने बाकी आरोपियों के लिए भी होटल आदि की व्यवस्था कराई। इससे पहले भी वे अनगिनत डकैतियां व लूट की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं।
वे हर बड़े मामले को अंजाम देने के लिए फ्लाइट को ही सुरक्षित मानते हैं। इसके अलावा बड़े होटलों में पुलिस हाथ डालने से कतराती है, इसीलिए वे इन होटलों को ही चुनते हैं। वैसे भी उन्हें बिना एयर कंडीशन के रहने में मुश्किल आती है।
साठ हजार की लूट शर्मनाक
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि देशभर के बड़े शहरों के नामी लुटेरों से उनका संपर्क है। शहर के नाके पर चैकिंग के कारण वह कार से शहर क्रॉस नहीं करते। उनके साथी नए शहर में उन्हें नई कार मुहैया करा देते हैं या वह वहीं से कोई कार चुरा लेते हैं। आरोपियों ने बताया कि अब तक की घटनाओं में सबसे छोटी लूट 60,000 रुपए की है, जो उनके लिए शर्मनाक है।
कैसे बना गैंग
रिमांड के दौरान दिल्ली निवासी सुशील कुमार उर्फ सागर ने बताया कि उसने 1993 में शराब बेचने का धंधा शुरू किया था। इस दौरान भगवानपुरा निवासी अमरजीत से उसकी मुलाकात हुई। इन तीनों ने दिल्ली निवासी अनिल व काला और जेल रोड, लुधियाना निवासी लक्की (जोकि हवाला की गाड़ियां चलाते थे) के साथ मिलकर 18 लाख की लूट की। इसमें सुशील के हिस्से में चार लाख रुपए आए। इससे अमरजीत व सुशील ने हिस्सेदारी में शराब के कारोबार को बढ़ाया और उतरांचल में शराब बेचने का काम शुरू किया।
उस दौरान सुशील, उसका भाई व देसराज पर एनडीपीएस एक्ट के तहत पर्चा दर्ज हो गया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मेरठ जेल में कुछ दिन बिताने के बाद एक दिन पेशी के दौरान वह फरार हो गया। उसे भगाने में देसराज व संजय छोटू ने मदद की। इसके बाद वे पंजाब आ गए। यहां अमरजीत के दोस्त राज कुमार ने फगवाड़ा के मनी एक्सचेंज के बारे में बताया, पर मौका नहीं मिलने के कारण घटना को अंजाम नहीं दे पाए। इसके बाद उन्होंने फगवाड़ा में ही सुनार की दुकान लूटी। फिर कादियां में एक वैन से 20 लाख रुपए लूटे और तरनतारन रोड पर इंडिका कार चोरी की। पुलिस ने रिमांड के दौरान आरोपियों से 17.50 लाख रुपए व चार गाड़ियां भी बरामद की।
अब तक की बड़ी वारदातें
>> मई में इंडिका गाडी़ में सवार होकर बटाला-कादियां रोड पर मारुति कार रोककर 20 लाख की लूट की।
>> जून में भक्तांवाला सेिथत एसबीआई बैंक की कैश वैन लूट ली और गार्ड को गोली मारी। वैन में 35 लाख रुपए थे।
>> जुलाई में करोल बाग, दिल्ली में मनी एंक्सचेंज की दुकान लूटी।
>> अगस्त में दिल्ली में ही एक ठेके की दुकान के आगे ऑल्टो कार में से 12 लाख रुपए लूटे।