छोटी-छोटी बातों, मूल्यों, विचारों, दुख और सुख से मिलकर बना है यह जीवन। ‘अलकेमिस्ट’ के प्रसिद्ध लेखक पाओलो कोएलो के पास ऐसे ढेरों सूत्र हैं, जो सरल शब्दों में बताते हैं कि जीवन क्या है, जीने की कला क्या है। बात छोटी पर गहरी है। जरूरत है, इसे आत्मसात करने की। हर व्यक्ति दूसरे से अलहदा है और अपने आप में अनूठा भी। हर व्यक्ति की यह हर संभव कोशिश होनी चाहिए कि उसका यह अनूठापन बरकरार रहे। वह दूसरों जैसा नहीं, अपने जैसा है और यही उसकी खासियत है।
1. जीवन के प्रवाह मंे प्रत्येक व्यक्ति को दो चीजें प्राप्य हैं - कर्म और ध्यान। ये दोनों एक ही लक्ष्य की ओर लेकर जाती हैं।
2. हर व्यक्ति को दो चीजें मिली हैं - शक्ति और गुण। शक्ति से वह अपनी नियति को नियंत्रित करता है और गुणों का दूसरों के साथ साझा करता है। प्रत्येक मनुष्य को यह बोध होना चाहिए कि कहां पर शक्ति और कहां पर गुणों का इस्तेमाल करना है।
3. हर व्यक्ति को दो अधिकार मिले हैं - सही राह पर चलने का अधिकार और भूल करने का अधिकार। इसके बाद उत्तरोत्तर जीवन से मिला हर पाठ सही राह की ओर ही लेकर जाता है।
4. हर व्यक्ति की अपनी कल्पना और आदर्श होता है। वह इस दुनिया में है, अपनी उन्हीं कल्पनाओं और आदर्शो के लिए। वह जो भी काम करता है, उस उत्साह के रेशे-रेशे में ये कल्पना और आदर्श अभिव्यक्त होते हैं।
5. हो सकता है, इन आदर्शो की राह में कभी कोई बाधा आ जाए। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसे भूल जाएं। वह फिर से जीवन में लौटकर आएगा।
6. हर पुरुष के भीतर एक स्त्री और हर स्त्री के भीतर एक पुरुष छिपा होता है। लेकिन जरूरी है दोनों के बीच एक संतुलन और सहज-बोध और उस सहज-बोध का वस्तुनिष्ठ तरीके से इस्तेमाल।
7. हर व्यक्ति को दो भाषाओं का ज्ञान जरूर होना चाहिए। पहली है, सामाजिक भाषा और दूसरी संकेतों की भाषा। सामाजिक भाषा के द्वारा वह समाज के साथ और उस समाज में रहने वाले मनुष्यों के साथ आदान-प्रदान करता है और दूसरी भाषा से ईश्वर के संदेशों को ग्रहण करता और समझता है।
8. हर व्यक्ति को आनंद की तलाश करने और आनंदित होने का अधिकार है। खुशी बहुत निजी मसला है। अगर एक बात किसी को खुश और संतुष्ट करती है तो यह कतई जरूरी नहीं कि इससे दूसरों को भी उतनी ही खुशी और संतुष्टि मिले।
9. हर व्यक्ति के भीतर दीवानगी और पागलपन की एक लौ हमेशा प्रज्जवलित रहनी चाहिए। लेकिन इसी के साथ उसका व्यवहार भी सामान्य और संतुलित होना चाहिए।
10. कुछ गलतियां मृत्यु के समान अक्षम्य होती हैं - दूसरों के अधिकारों का सम्मान न करना, लकवे की हद तक भीरु और डरपोक होना, किसी के लिए यह सोचना कि वह जीवन में घट रहे अच्छे या कि बुरे के योग्य नहीं है और कायर होना। यह ऐसी गलतियां हैं, जिनकी कोई माफी नहीं।
11. हमें अपने शत्रु से प्रेम करना चाहिए, लेकिन उससे कोई गठजोड़ नहीं। शत्रु इसलिए है कि हमें हमारी तलवार की धार और ताकत का एहसास होता रहे।
12. हर धर्म एक ही ईश्वर की ओर लेकर जाता है और हर धर्म का समान रूप से आदर किया जाना चाहिए।
13. एक व्यक्ति, जो किसी धर्म को अंगीकार करता है, वह उस धर्म में पूजा और आराधना के सामूहिक तरीके को भी स्वीकार करता है। अपने सभी कामों और निर्णयों के लिए वह खुद जिम्मेदार है। वह इस जिम्मेदारी को पलट नहीं सकता और सबकुछ के लिए धर्म को उत्तरदायी नहीं ठहरा सकता।
14. आज से पवित्र और अपवित्र को विभाजित करने वाली दीवार गिर गई। अब सबकुछ पवित्र होगा।
15. वर्तमान का हर कदम अपने परिणामों में भविष्य को प्रभावित करता है और इसी क्रम में अतीत का प्रभाव वर्तमान पर पड़ रहा है।