bhaskar Web English
HomeNewsRajasthanBikaner Bikaner

जाग-जाग रे मतवात्त भैरूं..

बीकानेर. ‘चकमक करतो बण्यो चूरमो ऊपर घी री धार..’ टेर से कोडमदेसर भैरवजी का ‘थाण’ पूरे दिन गूंजता रहा। बीकानेर से बड़ी संख्या में यहां पैदल व वाहनों पर पहुंचे भक्तों ने अलसुबह से ही भगवान के पूजन-अभिषेक का क्रम शुरू कर दिया।

आदमकद प्रतिमा का तेल से अभिषेक करने के साथ ही वर्को से सजाया गया। इस दौरान पंडितगण ‘ú ह्रीं बटुकाय, आपदुधारणाय, क्रूं क्रूं बटुकाय, ह्रीं ú नम: शिवाय..’ मंत्र का जाप करते रहे वहीं मंदिर के एक कोने में ढोलक-मंजीरों की ताल के साथ भैरव बाबा के भजन भी चलते रहे। कभी ‘जाग-जाग रे मतवात्त भैरूं की’ टेर लगती तो कभी ‘म्हारो भैरूं बाबो इसो रे लाडलो..।’

अभिषेक और पूजन के इस दौर के साथ ही नवविवाहित जोड़े गठबंधन से बंधकर भैरवजी की परिक्रमा (जात) करते रहे वहीं कई छोटे-छोटे बच्चों का मुंडन संस्कार (झड़ूला) भी यहां हुआ। पूजन-अभिषेक का दौर पूरा होते ही लगने लगा ठाकुरजी को भोग। सैकड़ों लोगों ने जहां कोडमदेसर मंदिर परिसर में ही ठाकुरजी के लिए चूरमे का भोग बनाया वहीं कई लोगों ने इमरती और कचौड़ी का प्रसाद चढ़ाया।

बीकानेर से 40 किलोमीटर दूर सीसा गांव में शनिवार को शीशा भरव का मेला भरा। सुबह भैरव प्रतिमा का घी, दूध व दही से अभिषेक किया गया। सुबह साढ़े आठ बजे यज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें चार यजमान बैठे। यज्ञ करीब चार घंटे तक अनवरत चला। मेले में 400 के आस-पास पैदल यात्री पहुंचे जिनकी रास्ते में सेवादारों ने जगह-जगह सेवा की। मेले में सुबह व शाम महाप्रसाद का आयोजन किया गया।

मेले की पूर्व संध्या पर रात्रि में जागरण का आयोजन किया गया। पारीक समाज की पाराशर युवा समिति ने मेले की व्यवस्था में सहयोग दिया। रात 12 बजे मंदिर में विशेष आरती की गई। रामपुरिया कॉलेज के पीछे स्थित मंदिर में कृपाल भैरूंनाथ का अभिषेक, हवन पूजन, प्रसाद, आरती, स्तुति भवानीशंकर शर्मा के सान्निध्य में किया गया। जागरण का आयोजन किया गया। पूजा-अर्चना में खूमराज पंवार और हीरालाल हर्ष आदि शामिल हुए।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: