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खजाने पर बैठकर मांग रहे इमदाद

बीकानेर. लगातार आर्थिक तंगी का रोना रो रहे नगर निगम के आंसू घड़ियाली साबित होने वाले हैं। नगरीय विकास शुल्क और हाउस टैक्स के पेटे लोगों पर बकाया पड़े दस करोड़ से अधिक रुपए अगर वसूल नहीं किए तो निगम को स्वायत्त शासन विभाग की फटकार का शिकार होना पड़ेगा।

स्वायत्त शासन विभाग ने स्थानीय निकायों को अपनी आय के स्रोत बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो निकायों को मिलने वाली इमदाद पर असर पड़ सकता है। अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में नगरीय विकास शुल्क के रूप में ३ करोड़ 75 लाख 66 हजार 287 रुपए अर्जित करने हैं और हाउस टैक्स के रूप में 7 करोड़ 48 लाख 39 हजार 634 रुपए बकाया चल रहे हैं।

अगर निगम इस राशि को वसूल कर लेता है तो उसे शहर के विकास सहित अन्य मसलों के लिए सरकारी इमदाद लेने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। तथ्य यह है कि निगम ने नगरीय विकास शुल्क वसूलने के लिए अभी तक रणनीति ही नहीं बनाई है। हालांकि निगम के पास नगरीय विकास शुल्क की मांग और गृह कर के डिफाल्टर की सूची तैयार है। इस सूची को तैयार हुए भी अर्सा बीत गया है लेकिन वसूली का काम शुरू नहीं हुआ है।

निगम की ओर से कुछ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं लेकिन वसूली के लिए स्टाफ नहीं लगाया गया है। जानकारों का कहना है कि जब तक परिषद का स्टाफ घर-घर जाकर वसूली नहीं करेगा तब तक शुल्क की वसूली नहीं हो सकेगी। पिछली बार हाउस-टैक्स की वसूली के लिए कर्मचारियों की एक टीम बनाई गई थी जिसने गृहकर की वसूली भी की लेकिन इसके बाद इस तरह का कोई भी अभियान नहीं चलाया गया है।

इतने हैं बकाया
नगर निगम को बीकानेर की 384 फर्मो से गृहकर की वसूली करनी है। इसमें बकाया राशि 5 करोड़ 75 लाख 52 हजार 72 रुपए है जिस पर 1 करोड़ 72 लाख 87 हजार 562 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इस प्रकार 7 करोड़ 48 लाख 39 हजार 634 रुपए गृहकर के रूप में बकाया है। यह गृहकर के बंद होने के पहले का शेष है। गृहकर बंद कर देने की एवज में शुरू किया गया नगरीय विकास शुल्क भी तीन करोड़ रुपए से अधिक बकाया चल रहा है।

159 फर्मो पर 3 करोड़ 75 लाख 66 हजार 287 रुपए बकाया चल रहे हैं। इसमें वर्ष 2007-08 के लिए 1 करोड़ 51 लाख 38 हजार 625 और वर्ष 2008-09 के लिए 2 करोड़ 9 लाख 13 हजार 787 रुपए बकाया हैं। इस बकाया राशि पर 15 लाख 13 हजार 875 रुपए जुर्माना भी लग चुका है। निगम सूत्रों का कहना है कि दस करोड़ से अधिक बकाया राशि की वसूली के लिए टीम को कुछ अधिकार भी मिलने चाहिए। इसके अलावा अगर फर्मो को करों की अदायगी में छूट भी मिले तो यह कार्य आसान हो सकता है।

टैक्स वसूली के लिए सभी को सूचित कर दिया गया है। रिमाइंडर भी भेजे जा रहे हैं। जल्दी ही टीमें भी जाएंगी और इन प्रयासों के बाद भी अगर कोई टैक्स नहीं देगा तो उसके खिलाफ कुर्की का प्रस्ताव निगम की साधारण सभा में रखा जाएगा।
-मौलाबख्श, आयुक्त, नगर निगम





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