जोधपुर. राज्य सरकार की लिखित में स्वीकृति नहीं मिलने के कारण अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियां अटक कर रह गई हैं। यूनिवर्सिटी ने अतिथि शिक्षकों को फिक्स पैमेंट पर रखने का निर्णय सिंडीकेट में अनुमोदित करवाने के बाद बिना राज्य सरकार की स्वीकृति के साक्षात्कार तो करवा दिए, लेकिन अब बिना स्वीकृति नियुक्तियां करने में परेशानी आ रही है।
जेएनवीयू ने पिछले माह अतिथि शिक्षकों को फिक्स पैमेंट पर लेने का निर्णय लिया था। इस संबंध में गठित कमेटी ने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति 7950 रुपए प्रतिमाह पर करने की अनुशंसा की। इसके आधार पर जेएनवीयू की सिंडीकेट ने भी इस अनुशंसा का अनुमोदन किया।
सिंडीकेट ने यह भी निर्णय लिया कि इस संबंध में राज्य सरकार को जानकारी देते हुए स्वीकृति मांगी जाएगी। यूनिवर्सिटी ने सरकार को पत्र भेजा तथा स्वीकृति मांगी, लेकिन यह आदेश आने से पहले ही इन अतिथि शिक्षकों के साक्षात्कार शुरू करवा दिए। अधिकांश विभागों के साक्षात्कार 26 से 28 अगस्त के बीच आयोजित हो गए।
कुछ विभागों के साक्षात्कार होने रह गए। ज्ञात रहे कि राज्य सरकार व यूनिवर्सिटी के बीच हुए एमओयू के तहत यूनिवर्सिटी वित्तीय निर्णयों में बिना राज्य सरकार के स्वीकृति कोई कदम नहीं उठा सकती और राज्य सरकार ने इस संबंध में अभी तक कोई लिखित आदेश नहीं भेजा है। लिखित में कोई आदेश नहीं आता है तो यूनिवर्सिटी इन अतिथि शिक्षकों की फिक्स पैमेंट पर नियुक्ति नहीं कर सकेगी जबकि यूनिवर्सिटी के इस शैक्षणिक सत्र के तीन माह पूर्ण हो चुके हैं।
पलट चुके हैं शिक्षामंत्री भी
इस संबंध में शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ भी अपने बयान बदल चुके हैं। पहले शिक्षामंत्री सर्राफ ने कहा था कि अतिथि शिक्षकों के मामले में निर्णय से पहले राज्य सरकार की स्वीकृति लेनी चाहिए, लेकिन अब शिक्षामंत्री का कहना है यूनिवर्सिटी स्वायत्तशासी संस्था है। ओएसडी ओपी गुप्ता ने तो लिखित में स्वीकृति देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया था।
केवल जेएनवीयू ही स्वायत्त!
यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता के मामले में शिक्षामंत्री की दो विश्वविद्यालयों के बारे में अलग-अलग राय है। जेएनवीयू ने राज्य सरकार के स्वीकृति बगैर ही साक्षात्कार करवा दिए तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, वहीं उदयपुर को अतिथि शिक्षकों की फिक्स पैमेंट पर रखने की स्वीकृति से साफ इनकार कर दिया गया था।