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यूं होती है पितरों को तृप्ति

पितृ पक्ष विशेष. pitra पितरों को तृप्त करने के लिए जलदान किया जाता है। यही तर्पण कहलाता है।

>> तर्पण में दोनों हाथों में जल लेकर जिनका तर्पण करना है, उनका नाम लेकर जल छोड़ा जाता है।
>> तर्पण के लिए योग्य पात्र परिवार में सबसे ज्येष्ठ व्यक्ति होता है। यदि पिता का तर्पण करना हो तो उसके लिए ज्येष्ठ पुत्र सुपात्र होगा। ज्येष्ठ पुत्र द्वारा तर्पण न किए जाने की स्थिति में छोटा पुत्र भी तर्पण कर सकता है। पुत्र न होने की स्थिति में भाई तर्पण कर सकता है।
>> तर्पण के लिए तीर्थ श्रेष्ठ होते हैं। तीर्थ पर तर्पण न कर पाने की स्थिति में नदी, तालाब, जलाशय आदि के किनारे तर्पण करना श्रेष्ठ होता है। घर में किया गया तर्पण भी मान्य है।
>> तर्पण के लिए श्रेष्ठ समय ‘पुतप काल’ होता है। यह काल दोपहर 1 बजे से 3 बजे के मध्य माना गया है।
>> तर्पण से पूर्व विष्णु भगवान का पूजन किया जाता है।





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