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सुख दिन बीते रे भईया अब दु:ख आयो रे :

न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज पर मंदी की भयानक मार देखकर बाजार विशेषज्ञों के होश उड़ गए हैं। इन जनाब को देखिए बेचारे बाजार के विशेषज्ञ माने जाते हैं लेकिन मंदी की मार इतनी जबरदस्त है कि जेम्स डेनारो कुछ समझ नहीं पा रहे हैं आखिर करें तो क्या करें।

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ये क्या हो गया रामा रे, ये क्या हो गया मौला रे :

फिलीपींस के शेयर मार्केट पर भी अमेरिकी मंदी का असर देखा जा रहा है। शेयर व्यापार से जुड़े ये दोनों चेहरे थम्स को अप-डाउन कर आने वाले खतरे की चेतावनी देते हुए।

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कोई लोटा दे मेरे बीते हुए दिन :

हांगकांग भी विश्व बाजार मंदी के असर से नहीं बच पाया है। हांगकांग की एक ब्रोकरेज फर्म में ये जनाब समाचार पत्र में बाजार की खबरों को पढ़ने से दु:खी हो गए। अरे सर ईश्वर पर भरोसा रखो जिंदगी में धूप-छांव तो आती ही रहती है।

बड़ी मुश्किल है खोया मेरा दिल है : दक्षिण कोरिया में शेयर बाजार के उतार चढ़ाव पर नजर रखें ये जनाब तो बस यही कह रहे हैं, मैं रोऊं या हंसू करू मैं क्या करूं। अरे जनाब अब बाजार तो गया नीचे, अब अपने दिल का ख्याल करो और फोन को बंद करो।

दिल की धड़कन है या गोलियों का शोर : एक भारतीय निवेशक मुंबई स्टॉक एक्सचेंज की डिजीटल ब्रॉडशीट पर सेंसेक्स के उतार चढ़ाव के रिफ्लेक्शन को देखकर तनाव की मुद्रा में। होता है भाई बाजी लगाने पर अप एंड डाउन तो होता ही रहता है, तो टेंशन लेने का नहीं देने का।

जाने क्या होगा रामा रे : इन जनाब को डॉलर भी चाहिए और सोने के सिक्कों का साउंड भी। अमेरिका में मंदी की मार है लेकिन ये बंदा यूं हार मानने वाला नहीं, सच भी है खुद पर भरोसा हो तो एक दाव लगाने से बाजी पलट भी जाती है।

तस्वीरों का स्रोत : भारतीय निवेशक की तस्वीर एफपी से और अन्य सभी तस्वीरें एपी एजेंसी से ली गई हैं।

प्रस्तुति और परिकल्पना : भास्कर डॉट कॉम के लिए राजेश यादव।

विश्व शेयर बाजार में आए ताजा संकट को बयान करती ये तस्वीरें अपने आप में बहुत कुछ कहती हैं। देश कोई भी हो बस निवेशकों के नाम और चेहरे जुदा-जुदा हैं, पर मंदी की मार का दर्द हर चेहरे पर एक सा ही होता है।





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आपके विचार
स्वप्रेम
Friday, 19th Sep 2008, 0:18
सच है बाज़ार किसी का नहीं होता, अर्थअव्यवस्था के चलते अमेरिका ये दौर तो झेल जाएगा लेकिन जिन्हें उभरते हुई शक्तियां कहा जा रहा है उन पर इस संकट से निकलना इतना आसान नहीं होगा। बाज़ार में एक दिन में हाहाकार मच जाता है तो दूसरे दिन रौनक ही रौनक हो जाती है। दरअसल, मार्केट कुछ लोगों के हाथों का खेल बस रह गया है। इस सबके बीच छोटा निवेशक जो पैसा को खून पसीने से कमाता है, वो पैसा इस तूफान में उड़ जाता है।
swapnesh narkhede
Sunday, 21st Sep 2008, 20:15
KYA HOGAYA HEY BAZAR KO MERA TO 20000 KE INDEX PAR PAISA ATKA HUA PATA NAHI RATE AAIYENGE BHI YA NAHI ABHI AAISA LAGTA HEY KI SENSEX 9000 PAR AA JAIYEGA BUT YAHA SAY AVRAGE KARNE MAIN BHI PAISA AADHA HOGAY AHEY SWAPNESH NARKHEDE
ajay gupta
Sunday, 28th Sep 2008, 7:02
no dobut but where is a fall there is a rise
अविनाश वा
Wednesday, 1st Oct 2008, 5:21
निवेशक दीवाना हो गया रे एक जैसा अफसाना हो गया रे