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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. जिला पंचायत विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों में विभिन्न निर्माण कार्यो के लिए जारी की गई राशि का कोई माई-बाप नहीं है। वर्तमान एवं पूर्व सरपंचों द्वारा निर्माण कार्ये के नाम पर राशि आहरित कर डकार जाने के जिले में 618 मामले हैं, जिनमें 1 करोड़ 60 लाख रुपए की वसूली की जानी है।
सरकारी पैसे का दुरुपयोग देखना है तो ग्राम पंचायतों से अच्छी जगह और कोई नहीं हो सकती। सरकार द्वारा सुविधाएं मुहैया कराने के नाम पर लाखों-करोड़ों का आबंटन दिया जा रहा है, लेकिन जारी की गई राशि का उपयोग कहां हो रहा है इस बात की पूछ-परख करने वाला कोई नहीं है।
जिले में ग्रामीण विकास के नाम पर पंचायतों को जारी की गई राशि में जमकर अनियमितता हो रही है। केवल जिले का आंकड़ा देखें तो फर्जी निर्माण के अलग-अलग 716 मामलों 1 करोड़ 93 लाख रुपए की राशि सरपंचों के अंटे में हैं।
भ्रष्टाचारी सरपंचों को धारा 18 के तहत नोटिस देने व संतोषजनक जवाब नहीं पाए जाने की स्थिति में धारा 92 के तहत वसूली की कार्रवाई करने का प्रावधान तो है, लेकिन जटिल और अत्यंत धीमी प्रक्रिया होने के कारण सरपंचों के हौसले बुलंद हंै। पुराने सरपंचों से वसूली के ज्यादातर प्रकरणों में अंतत: लीपापोती हो जाना ही वर्तमान या भावी सरपंचों के लिए भरपूर भ्रष्टाचार करने का मार्गदर्शन साबित हो रहा है। यही कारण है कि अधिकारियों की मौन स्वीकृति के चलते कागजों में निर्माण का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
ढेरों शिकायतें, कोई फर्क नहीं
सरपंचों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार की जानकारी कभी पंचों द्वारा तो कभी ग्रामीणों द्वारा उच्चधिकारियों तक समय रहते ही पहुंचा दी जाती है। इसके विपरीत लिखित शिकायतों के बावजूद इन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
जिला पंचायत के एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि से सरपंचों की अनियमितता के संबंध में चर्चा करने पर उन्होंने कार्रवाई की बात करने की बजाय सीधे यह कह दिया कि सरपंचों से तो कलेक्टर हार चुके हैं, ऐसे में उन्हें अब कौन काबू में कर सकता है। उनका यह भी कहना था कि वैसे भी आजकल सारे काम पंचायत के माध्यम से ही हो रहे हैं, जिससे उन्हें अधिक निराश नहीं किया जा सकता। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की यही सोच और निष्क्रियता के चलते ही अपने पांच वर्ष का कार्यकाल समाप्त करते तक सरपंच शासन को लाखों रुपए का चूना लगा चुके होते हैं।
मस्तूरी जनपद सबसे भ्रष्ट
जिले में भ्रष्टाचार के क्षेत्र में मस्तूरी जनपद का नाम सबसे ऊपर है। मस्तूरी में 146 मामलों में 58 लाख 7378 रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक केवल 15 मामलों का निराकरण करते हुए छह लाख रुपए ही वसूले जा सके है। इसी तरह भ्रष्टाचार में दूसरा स्थान बिल्हा जनपद का है। बिल्हा में 76 मामलों में 36 लाख 98 हजार 428 रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है। इसके विरुद्ध केवल 16 मामलों में साढ़े तीन लाख रुपए की ही वसली की जा सकी है।
गौरेला में एक रुपए की वसूली नहीं
वसूली के मामले में गौरेला जनपद सबसे सुस्त साबित हुआ है। गौरेला में 58 मामलों में 7 लाख 6 हजार 101 रुपए रुपए वसूलने थे, जिसके विरुद्ध आज तक एक रुपए की वसूली नहीं हो सकी है। इसके विपरीत लोरमी जनपद वसूली में अव्वल नंबर पर है। लोरमी में 25 मामलों में 9 लाख 94 हजार रुपए की वसूली करनी थी। इसके विरुद्ध 20 मामलों में 8.50 लाख वसूले जा चुके हंै।
वसूली की खानापूर्ति
सरपंचों से की जाने वाली वसूली नगदी ही हो यह जरूरी नहीं है। सरपंच द्वारा निर्माण के नाम पर राशि आहरित कराने के बाद निर्माण नहीं कराने की स्थिति में उससे वही निर्माण पूरा कराया जाता है। निर्माण के बाद सीईओ द्वारा सत्यापन कर संबंधित एसडीओ को सरपंच के पक्ष में रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाती है। दिक्कत यह है कि अधिकृत होने के बाद भी सरपंचों पर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं करने वाले सीईओ ही अंत में वसूली हो जाने का प्रमाणपत्र दे रहे हैं।
वसूली की प्रक्रिया धीमी जरूर है, लेकिन लगातार जारी है। प्रक्रिया जटिल होने के कारण थोड़ा विलंब हो ही जाता है। यही कारण है कि जिले में कुल प्रकरणों में अब तक 25 प्रतिशत का निराकरण ही हो सका है।
—संजय अग्रवाल, एसडीएम