अम्बाला.
दूसरों की अंधेरी दुनिया में उजाला करने के विचार ने छावनी के एक बच्चे की सोच बदल दी। इसी सोच ने उसे मरणोपरांत आंखें दान देने की इच्छा शक्ति भर दी। छावनी के डीएवी रीवर साइड पब्लिक स्कूल में दसवीं कक्षा के 14 वर्षीय बालक शांतनु गर्ग ने अपने जन्म दिवस के अवसर पर शनिवार को अपनी आंखें मरणोपरांत दान देने के लिए फार्म भरा।
शांतुन ने बताया कि जब वह नेत्रहीनों को देखता तो उसकी इच्छा होती है कि वह उनकी जिंदगी में रोशनी भर दे। जब उसे पता चला कि मरने के बाद भी आंखें दान की जा सकती है तो उसने प्रतिज्ञा की कि वह अपने आंखें जरूर दान देगा।
इसी जज्बे के चलते उसने धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा के सच नेत्रालय में जाकर नेत्रदान प्रतिज्ञा पत्र भर दिया। शांतनु का कहना है कि उसे ऐसा करके बहुत खुशी हुई है कि उसकी आंखें किसी और के काम आएंगी।
जन्म दिन पर इससे बड़ा कोई अच्छा काम नहीं हो सकता। इस पर शांतनु के पिता संजय गर्ग का कहना है कि उन्हें अपने बेटे पर नाज है जो दूसरों के लिए सोचता है।