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International International इस्लामाबाद.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सरकार की बर्खास्तगी और संसद को भंग करने से जुड़ी अपनी विशेष शक्तियों को छोड़ने की पेशकश की है। जरदारी चाहते हैं कि इसके लिए संसद की एक समिति गठित की जाए, जो इन विशेष अधिकारों को वापस लेने और संसद को सर्वोपरि बनाने के तौर-तरीके तय कर सके।
शनिवार को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को पहली बार संबोधित करते हुए जरदारी ने कहा, ‘इस देश के इतिहास में पहले कभी किसी राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियां नहीं सौंपी हैं।’ गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति व सैन्य शासक जन. परवेज मुशर्रफ ने एक संविधान संशोधन के जरिए राष्ट्रपति को ये विवादास्पद शक्तियां सौंपी थीं।
चार अपदस्थ जज बहाल
पीपीपी नीत सरकार ने पिछले साल इमरजेंसी के दौरान अपदस्थ किए गए जजों में से चार को शनिवार को बहाल कर दिया। हालांकि सरकार ने पूर्व चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी को उनके पुराने पद पर बहाल करने की संभावना से लगभग इनकार कर दिया है। देश के चीफ जस्टिस अब्दुल हमीद डोगर ने सुप्रीम कोर्ट के दो अपदस्थ जजों के अलावा सिंध हाईकोर्ट के दो अपदस्थ जजों को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ दिलाई।
भारत-पाक संबंध : जरदारी ने अपने संबोधन में कहा, किसी भी अन्य देश पर हमलों के लिए आतंकियों द्वारा पाक सीमाओं का इस्तेमाल रोकना चाहिए। हालांकि आतंक के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर पाक संप्रभुता व सीमाओं का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं है।
एलओसी पर व्यापार : भारत के साथ संबंधों के बारे में रचनात्मक तरीके से दोबारा सोचने की जरूरत है। नियंत्रण रेखा के दोनों ओर व्यापार शुरू होना चाहिए।
सभी मसलों के समाधान के प्रयास : भारत-पाक के बीच शांति और सामान्य संबंधों की बहाली के लिए कश्मीर सहित सभी मसलों के समाधान के प्रयास जारी रखे जाएंगे।
राग कश्मीर : जरदारी ने अपने संबोधन में कश्मीरियों के कथित मौलिक अधिकारों की बहाली के लिए जारी संघर्ष को समर्थन देने की प्रतिबद्धता फिर जाहिर की है।