News
Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
बच्चों की परवरिश के मामले में आए नए तथ्य से सामने आया कि जब बात लड़के की परवरिश की आती है, तो पिता उतने फिट नहीं बैठते जितनी कि मम्मियां। वहीं लड़की यानी बेटी की देखभाल के लिए माता-पिता, दोनों उतावले होते हैं। शहर में भी ऐसे पापा हैं जो बच्चे की परवरिश के लिए घर पर समय व्यतीत करते हैं। बच्चों को उतनी अच्छी और सटीक परवरिश नहीं दे पाते, जितनी एक मां देती है।
खास बात यह है कि ऐसा अधिकतर लड़के की परवरिश में होता है। ब्रिटेन की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में कुछ समय पहले हुए एक शोध में यह बात निकलकर आई थी। वैसे भी कहा जाता है कि एक पिता चाहे पूरा वक्त घर पर बिता दें, लेकिन बच्चे को क्वालिटी समय नहीं दे पाते। ऐसा शायद इसलिए कि वे खुद को बच्चे से अधिक गहराई और आत्मीयता से नहीं जोड़ पाते, जितना कि एक मां।
सभी की जिम्मेदारी 50-50
शहर के वर्किग पैरेंट्स तो मान रहे हैं कि वे अपने बच्चों को बराबरी से पूरा क्वालिटी टाइम दे रहे हैं। वर्किंग डैड का कहना है कि वे बच्चों से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाते समय ये नहीं मानते कि उनके घर लड़का है या लड़की, जबकि वर्किग मॉम्स का मानना है कि बेबी गर्ल के प्रति डैड का बिहेवियर बेबी ब्वॉय के मुकाबले काफी सॉफ्ट रहता है। डैड उनकी छोटी से छोटी प्रॉब्लम में ज्यादा इन्वॉल्व हो जाते हैं।
6000 बच्चों पर हुआ परीक्षण
ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने करीब ६क्क्क् ऐसे बच्चों की परवरिश का सूक्ष्म परीक्षण व निरीक्षण किया जो अपने शुरुआती दिनों में माता व पिता दोनों की देखभाल में पले-बढ़े। इनके बच्चों के व्यवहार में माता-पिता के संपर्क के अनुसार काफी अंतर पाया गया।
ये हैं कारण
पढ़ाई में होते हैं कमजोर
परीक्षण में यह भी पाया गया कि जिन बच्चों ने लगातार १५ घंटे पिता की निगरानी में बिताए थे, वे स्कूल जाने पर पढ़ाई में कमजोर निकले। उनका मानसिक विकास उतनी तेजी से नहीं हो पाया, जितना अन्य हमउम्र बच्चों का हुआ था। विशेष तौर पर लड़के-लड़कियों से काफी पीछे रहे। एक्सपर्ट्स के अनुसार पढ़ाई में पीछे रहे बच्चों का ठीक से मानसिक विकास न हो पाने के कारण ऐसा हुआ था।
एक साल बाद समझते हैं अंतर
शोध में उन बच्चों को एकदम स्वस्थ पाया गया, जिन्हें जन्म के एक वर्ष तक माता-पिता दोनों का साथ व परवरिश मिली। इनमें न तो कोई नकारात्मकता थी और न ही सकारात्मकता। दरअसल, बच्चे एक वर्ष के हो जाने के बाद ही माता-पिता में अंतर समझ पाते हैं। तब तक यदि उन्हें दोनों का बराबर प्यार व देखभाल मिले तो ऐसे बच्चों का विकास संतुलित होता है।
लड़के-लड़की में अंतर क्यों?
पिता द्वारा परवरिश के दौरान लड़के व लड़की की क्षमताओं में अंतर आने की वजह बच्चों के प्रति उनका नजरिया होता है। लड़कों को शायद बचपन से ही मजबूत माना जाता है और लड़कियों को कोमल व शांत, इसलिए उनकी परवरिश के तरीके में भी अंतर होता है। इन बदलावों व अंतर को देखते हुए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे को संतुलित परवरिश देने का प्रयास करें। भेदभाव से दूर रहकर उनकी उचित देखभाल करें, क्योंकि जन्म से लेकर छह वर्ष तक बच्चे के दिमाग पर आपके द्वारा कही गई व की गई गतिविधियों का गहरा प्रभाव पड़ता है।
मॉम और डैड की परवरिश में अंतर की मुख्य वजह होती है, उनके सोचने का तरीका। पुरुष का ध्यान जहां नौकरी और बाहरी दुनिया में अधिक लगता है, वहीं महिलाएं घरेलू सोच रखती हैं और बच्चे की हर छोटी-बड़ी बात को आसानी से समझ जाती हैं। पुरुषों में रचनात्मकता की कमी के चलते बच्चों का बौद्धिक व मानसिक विकास नहीं हो पाता।
- डा. आरपी गुप्ता, मनोचिकित्सक