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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. पड़ोसी उत्तरांचल राज्य भाजपा के संगठन मंत्री धन सिंह रावत ने रविवार को जिले में चुनावी अभियान की कमान थाम ली। पोड़ी, गढ़वाल से आए इस नेता का कार्यक्षेत्र का विस्तार फिलहाल तय नहीं है, परंतु आते ही उन्होंने जिले व मंडल के नेता, कार्यकर्ताओं की क्लास ले डाली। संभागीय संगठन मंत्री रूपनारायण सिन्हा के पांच महीने पहले पद से इस्तीफा देने के बाद संभाग संगठन के नेता के बगैर चल रहा था। इससे पार्टी के कामकाज पर असर पड़ रहा था। शायद यही वजह है कि चुनावी वैतरिणी पार कराने के लिए भाजपा आलाकमान को पड़ोसी राज्य से संगठन के नेता को आयात करना पड़ा।
खबर है कि धन सिंह रावत आज हरिद्वार से उत्कल एक्सप्रेस से सीधे बिलासपुर पहुंचे। इससे पहले प्रदेश में सत्ता या संगठन के किसी नेता से उनकी राजधानी, रायपुर में मुलाकात का कोई संयोग नहीं हुआ। अलबत्ता उनके आने की सूचना भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) रामप्रताप ने टेलीफोन पर जिले के नेताओं को एक दिन पहले ही दे दी थी।
श्री रामप्रताप ने बताया कि श्री रावत फिलहाल जिले में भाजपा के चुनावी अभियान को गति देंगे। कार्यक्षेत्र के संभाग स्तर पर विस्तार के बारे में उन्होंने कुछ बताने से इनकार दिया, परंतु समझा जाता है कि जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों का भूगोल जानने के बाद वे पड़ोस के चांपा-जांजगीर जिले की ओर रुख कर सकते हैं। जिला भाजपा कार्यालय में डेरा डाले इस नेता ने मीडिया से बातचीत से साफ इनकार कर दिया। यहां तक की कैमरा सामने आते ही उन्होंने फाइलों में अपना चेहरा ढांप लिया। बताते हैं कि श्री रावत विशुद्ध रूप से संगठन के नेता हैं और वे प्रचार की बजाए कार्य को अधिक महत्व देते हैं।
आज दोपहर उन्होंने जिला भाजपा के पदाधिकारियों की औपचारिक बैठक ली। इसमें जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, महामंत्री राजा पांडे, नगर निगम में सभापति विनोद सोनी, एमआईसी सदस्य हसमुखराय कोठारी, जोन प्रभारी उदय मजूमदार आदि उपस्थित थे। दोपहर बाद उन्होंने तखतपुर में आयोजित विधानसभा सम्मेलन में शिरकत किया। इसके बाद उन्होंने सांसद पुन्नूलाल मोहले, पूर्व विधायक जगजीत सिंह मक्कड़, पूर्व मंत्री मनहरण लाल पांडे, मंडल महामंत्री मायाराम कश्यप, त्रिभुवन साहू, मंडी अध्यक्ष राजू क्षत्री, जिला पंचायत के उपाध्यक्ष घनश्याम वर्मा, सभापति अंजना मुलकुलवार आदि से बातचीत की।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक हाल ही में बेंगलोर में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में आसन्न विधानसभा चुनाव में सहायता के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में संगठन के नेताओं को सहायता के लिए भेजने का निर्णय लिया गया था। इसी निर्णय के परिप्रेक्ष्य में उत्तरांचल के संगठन मंत्री को जिले का दायित्व सौंपा गया।
संभागीय संगठन मंत्री रूपनारायण सिन्हा ने पार्टी की अंदरूनी कलह के चलते 27 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बाद से प्रदेश संगठन संभाग में चुनावी अभियान के लिए चिंतित हो गया था। संगठन मंत्री की कमी पूरी करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मांग की गई, परंतु इसमें सफलता नहीं मिली।