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जनसुनवाई की रिपोर्ट मंत्रालय को

बिलासपुर. इसमें क्षेत्र के ग्रामीणों की ओर से गंभीर बिंदुओं का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि हिर्री माइंस में ब्लास्टिंग के कारण 10 से 15 किलोमीटर क्षेत्र के मकानों में भी दरार पड़ गई है। पास में हाईकोर्ट का भवन बन रहा है, ऐसे में ब्लास्टिंग से परेशानी हो सकती है। स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड ने हिर्री डोलोमाइट माइन की क्षमता का विस्तार करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से अनुमति मांगी है। अनुमति देने से पूर्व छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा 26 अगस्त को हिर्री में जनसुनवाई रखी गई थी।

जनसुनवाई के दौरान करीब 800 ग्रामीणों ने हिर्री माइंस की क्षमता बढ़ाने की अनुमति न देने की मांग की, साथ ही इससे होने वाली परेशानियों से अवगत कराया। एडिशनल कलेक्टर पीएस एल्मा एवं पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी अजय गेडाम ने सुनवाई में ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायतों को मुख्यालय भेज दिया है।

भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीणों ने हिर्री प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 50 लाख रुपए प्रतिवर्ष के हिसाब से मुआवजे की मांग की है और कहा है कि खदानों की गहराई अधिक होने के कारण क्षेत्र का जलस्तर नीचे गिर गया है। आसपास के कुएं, हैंडपंप व तालाब गर्मी के दिनों में सूख जाते हैं।

प्रदूषण के कारण 90 फीसदी लोग ब्रोंकाइटिस की बीमारी से ग्रसित हैं। प्रबंधन से कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलती। बीएसपी द्वारा बाहरी लोगों को नौकरी दी जाती है, स्थानीय बेरोजगारों को कोई प्राथमिकता नहीं दी जाती। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की जगह गिरावट आई है। बीएसपी के स्कूल में पहले 12वीं तक की कक्षा लगती थी, जहां अब 10वीं तक की कक्षाएं ही लगती हैं। सड़कें जर्जर हो गई हैं, जिनकी मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

वायु व ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ ट्रकों से उड़ने वाली धूल के कारण पर्यावरण भी प्रदूषित हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावित गांव छतौना की सुविधाओं के लिए प्रबंधन ने कुछ नहीं किया। खदान से प्राप्त होने वाली रायल्टी का 10 फीसदी हिस्सा ग्राम पंचायत को दिया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने शर्त रखी है कि इन मांगों को पूरा किया जाता है तो माइंस की क्षमता बढ़ाने की अनुमति दी जाए, अन्यथा नहीं। क्षेत्रीय अधिकारी श्री गेडाम ने बताया कि उक्त रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है, जहां से केंद्रीय मंत्रालय को भेजी जाएगी। जनसुनवाई में ग्रामीणों की बात को ध्यान में रखते हुए अनुमति देने पर निर्णय लिया जाएगा।





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