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ग्रेजूएशन के बाद पीएचडी?

ग्वालियर. यूजीसी द्वारा ग्रेजूएशन के बाद सीधे पीएचडी करने की सुविधा दिए जाने से निश्चित ही पीएचडी करने वालों की संख्या में इजाफा होगा। पीएचडी के लिए पोस्ट ग्रेजूएशन या एमफिल की बाध्यता नहीं होने से छात्रों के कुछ साल भी बच सकेंगे।

इसलिए उनकी नजर में यह नियम सबके लिए फायदेमंद रहेगा। दूसरी ओर कालेज शिक्षकों के अनुसार यदि यूजीसी ऐसा नियम बनाती है तो इससे पीएचडी का स्तर गिर सकता है। इसका प्रभाव रिसर्च वर्क पर भी दिखलाई पड़ेगा। शिक्षकों व शोधार्थियों के अनुसार ग्रेजूएशन किया हुआ छात्र इतना परिपक्व नहीं होता है कि वह सीधे पीएचडी करने की काबिलियत रखता हो। इसलिए उन्हें यूजीसी का यह फैसला कतई ठीक नहीं लग रहा है।

प्रभावित होगा स्तर
पीएचडी यदि ग्रेजुएशन के बाद होगी तो उसका स्तर निश्चित ही प्रभावित होगा। पीजी करने के बाद छात्र पूर्ण परिपक्व हो जाता है और वह शोध करने की स्थिति में होता है। इसलिए यूजीसी को इस विचार को मूर्तरूप देने से पहले विभिन्न पक्षों पर गंभीरता से विचार करना होगा। डा. एसके सिंह, विभागाध्यक्ष वाणिज्य एवं प्रबंधन जीविवि

नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा
ग्रेजुएशन के बाद पीएचडी की सुविधा होने से शोधकार्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। पीजी के बाद ही छात्रों में किसी विषय के प्रति रुचि पैदा होती है। स्नातक किया छात्र मानसिक रूप से इतना विकसित नहीं होता है कि वह किसी विषय पर गहराई से शोधकार्य कर सके।
- डा. एनके नगाइच, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान केआरजी

ज्यादा उपयोगी नहीं रहेगी
यदि यूजीसी पीएचडी करने वाले छात्र के लिए कोई पाठ्यक्रम बनाती है तो कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। लेकिन सीधे-सीधे ग्रेजूएशन के बाद पीएचडी की सुविधा स्वयं छात्रों के लिए भी ठीक नहीं होगी। इसके अलावा विश्वविद्यालयों के अध्यादेश में भी परिवर्तन करना होगा। प्रो. केके श्रीवास्तव, गल्र्स कालेज मुरार

खत्म हो जाएगी गरिमा
अगर ऐसा हुआ तो पीएचडी की गरिमा खत्म हो जाएगी। क्योंकि जिस विषय में शोधकार्य करना है, पहले उस विषय में मास्टर डिग्री होना आवश्यक है। अगर यह निर्णय लागू होता है तो स्तरहीन शोधप्रबंध की बाढ़ आ जाएगी।
- डा. धर्मेद्र सक्सेना

ऐसे होती है पीएचडी
स्नातकोत्तर करने के बाद पीएचडी हेतु सर्वप्रथम गाइड, उसके पश्चात शोधकेंद्र का चयन करना पड़ता है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फार्म विश्वविद्यालय में जमा किया जाता है। छह माह उपरांत छात्र को विश्वविद्यालय में स्नोप्सेस (संक्षेपिका) जमा करनी होती है। बाद में विश्वविद्यालय आरडीसी की मीटिंग बुलाता है। इस मीटिंग में शोधार्थी का बायवा लिया जाता है, उसके पश्चात रजिस्ट्रेशन होता है। शोधकार्य पूर्ण होने के उपरांत तीन प्रतियों में शोध प्रबंध विश्वविद्यालय में जमा कराया जाता है।

बढ़ जाएगी रुचि
यूजीसी के चेयरमैन श्री थोराट के अनुसार इससे छात्रों में रिसर्च वर्क के प्रति रुचि बढ़ेगा। जब यह प्रस्ताव पास होगा तो ज्यादा से ज्यादा छात्र पीएचडी करने की सोचेंगे। वर्तमान में स्थिति यह है कि ग्रेजृूएशन करने के बाद टॉपर्स स्टूडेंट रिसर्च वर्क करने की बजाय प्रोफेशनल कोर्स करना ज्यादा बेहतर समझते हैं। यह प्रस्ताव पास होने से छात्रों को पीएचडी के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।





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