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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. मामूली बीमारियों में डाक्टर की बताई जानी पहचानी दवा खाने के बाद भी बीमारी ठीक न हो, तो इसमें कोई हैरत की बात नहीं। इन दिनों ऐसा बहुत हो रहा है।
मानव शरीर के भीतर कीटाणुओं की प्रतिरोधक क्षमता इस कदर विकसित हो चुकी है कि पुरानी, भरोसेमंद दवाएं बेअसर होने लगी हैं। डाक्टरों का कहना है कि गलत दवाओं या आधे-अधूरे डोज से ऐसा होता है। नीम हकीमों से या खुद डाक्टर बनकर ली जाने वाली दवाओं से यह समस्या अधिक पैदा हो रही है।
सर्दी, खांसी, बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द से पीड़ित व्यक्ति को भी हाई डोज देने की जरूरत पड़ने लगी है। दवाओं के असर नहीं करने से कुछ मामूली बीमारियां गंभीर रूप भी ले रही हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों के लिए भी यह चिंता का विषय है।
दवाएं इसलिए हो रहीं फेल
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सदस्य व मेडिसिन विशेषज्ञ डा. जीबी गुप्ता ने बताया कि दवाओं के असर नहीं करने के पीछे कई कारण हैं। जब बेवजह या बीमारी के विपरीत कोई दवा शरीर में प्रवेश करती है तो मरीज जिस बीमारी से पीड़ित है उसके कीटाणुओं में इन दवाओं को झेलने की क्षमता विकसित हो जाती है। मेडिसिन विशेषज्ञ और नेफ्रोलाजिस्ट डा. पुनीत गुप्ता ने कहा कि डाक्टर अगर सही दवा न दे या फिर मरीज को पर्याप्त डोज न मिले तो कीटाणुओं में रोधक क्षमता का विकास होता है। जैसे मच्छर मारने वाले पुराने क्वाइल और अगरबत्तियां बेअसर साबित होने लगी हैं।
नीम हकीम खतरा ए जान
लोकल या फिर ग्रामीण इलाकों के झोला छाप डाक्टर बिना तजुर्बे के पुरानी और पारंपरिक दवा देते हैं जिनका असर थोड़े समय का होता है। पैरामेडिकल और मेडिकल स्टोर्स वालों से भी कोई पूछे तो वे डाक्टर बनकर कोई भी सस्ती और लोकल दवा दे देते हैं। न तो पर्याप्त डोज मिलता है और न ही सही दवा।
सेल्फ मेडिसिन
आमतौर पर यह देखा गया है कि सर्दी, बुखार, सिरदर्द, खांसी में लोग खुद ही डाक्टर बन जाते हैं। दवा शुरुआत में तो असर कर जाती है लेकिन वह बीमारी उसे बार-बार होने लगती है। ऐसा इसलिए क्योंकि गलत इलाज का फायदा उठाकर कीटाणु ताकतवर हो जाते हैं।
मार्केटिंग का असर
सभी डाक्टरों के पास हर रोज दवा कंपनियों के आधा दर्जन एमआर (मेडिकल रिप्रेजेंटिव) विजिट करते हैं। नई-नई कंपनियां और नए-नए कंपोजिशन की दवाएं देने के लिए वे डाक्टरों पर दबाव डालते हैं, लालच देते हैं। कभी-कभी डाक्टर भी उनसे समझौता कर लेते हैं। यह भी अच्छी दवाओं के बेअसर होने की एक प्रमुख वजह है ।
दवाएं बेअसर इसलिए हो रही हैं कि लोग सही डोज नहीं ले रहे। मार्केटिंग भी एक बड़ा मुद्दा है क्योंकि इसके असर से मरीजों को सही दवा नहीं मिल पा रही।
- सेनापति जग्गी, संस्थापक अध्यक्ष, रायपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन