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पहले ही दौरे में पंजाब को जीत लिया राहुल ने

बस्सी पठाना (फतेहगढ़ साहिब). gandhi कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने सोमवार को फतेहगढ़ साहिब की जमीन पर कदम रखते ही उन तमाम कड़वाहटों को दूर कर दिया, जो देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की करीब 57 वर्ष पूर्व की गई यात्रा में उभरी थीं।

लोग पहली ही नजर में राहुल की सादगी के कायल हो गए। इससे पहले राहुल गांधी ने अमृतसर में पवित्र स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका।

गौरतलब है कि पं. नेहरू जब एक मेले में शिरकत करने यहां आए थे तो मास्टर तारा सिंह समेत अनेक सिख नेताओं ने तत्कालीन केंद्र सरकार के कथित पंजाब विरोधी रवैए के कारण प्रदर्शन किया था। इसके बाद से नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य फतेहगढ़ साहिब नहीं पहुंचा था। लेकिन राहुल ने सभी से बेहद आत्मीयता के साथ मिलकर लोगों का दिल जीत लिया। राहुल ने अपनी तीन दिवसीय पंजाब यात्रा के दौरान ऐतिहासिक जलियांवाला बाग पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

नौनिहालों के साथ बिताए पल : बस्सी पठाना में राहुल ने स्कूली बच्चों के संग भी कुछ पल बिताए। पहली कक्षा के मनमोहित सिंह से राहुल ने पूछा कि वह पढ़-लिख कर क्या बनेगा, तो जवाब मिला- एअरफोर्स में जाऊंगा। यह सुनकर राहुल मुस्कुरा दिए। राहुल ने बताया कि बच्चों से दोस्ती करना उन्हें अच्छा लगता है।

स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका : राहुल गांधी ने सोमवार सुबह आम श्रद्धालुओं के साथ स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका। सफेद कुर्ता-पायजामा पहने और पीले रंग का पटका बांधे राहुल ने लंगर भवन की पंगत में बैठकर ‘प्रशादा’ भी ग्रहण किया।

वाड्रा ने तैयार की दौरे की रूपरेखा
संजय गर्ग. अमृतसर. राहुल गांधी के पंजाब दौरे का कार्यक्रम उनके सुरक्षा दस्ते एनएसजी ने नहीं, बल्कि उनके जीजा रॉबर्ट वाड्रा ने तैयार किया था। राहुल को निर्धारित कार्यक्रम के हिसाब से 23 सितंबर को अमृतसर पहुंचना था, लेकिन वे एक दिन पहले ही दरबार साहिब पहुंच गए और वह भी बगैर किसी सुरक्षा घेरे के।

सूत्रों के अनुसार, करीब 15 दिन पहले वाड्रा चुपचाप दरबार साहिब आए थे। वहां की सुरक्षा व्यवस्था को देखकर उन्होंने उसी समय राहुल की यात्रा को हरी झंडी दे दी थी। राहुल के दौरे को लेकर कांग्रेस नेताओं में भी आखिरी समय तक अनिश्चितता बनी रही।





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