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भूकंप मापने का सिस्टम ठप

बिलासपुर. बहतराई स्थित भूकंप वेधशाला में जुलाई से नए तरीके से भूकंप की तरंगों को मापने का कार्य शुरू किया गया। राज्य की एकमात्र भूकंप वेधशाला में इसके लिए जीएसएन सिस्टम लगाया गया। चालू होने के कुछ ही दिनों बाद इसमें तकनीकी खराबी आ गई और इसमें काम करना बंद कर दिया।

अचानक आई खराबी के बाद स्थानीय अधिकारियों ने इसे सुधारने के मामले में हाथ खड़े कर दिए। तकनीकी जानकारी के अभाव में इसे सुधारना मुश्किल ही नहीं बल्कि उन्हें नामुमकिन लगा। बताया जाता है कि सिस्टम के खराब होने की जानकारी स्थानीय अधिकारियों ने भारत मौसम विज्ञान विज्ञान विभाग दिल्ली को दी है, लेकिन अभी तक इसे सुधारने विशेषज्ञ नहीं आए हैं।

इधर वेधशाला में भूकंप की तीव्रता मापने विद्युत चुंबकीय भूकंप मापी का उपयोग किया जा रहा है। कोनी में स्थित होने के दौरान भी वेधशाला में इसी पद्धति से भूकंप की तरंगों को मापा जाता था। उल्लेखनीय है कि मौसम वेधशाला में भूकंप मापने का कार्य जनवरी 2008 से बंद था। इसकी शुरुआत करने देर से ही सही, लेकिन जुलाई में दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम शहर आई।

टीम में दो सदस्य थे, हरज्ञान सिंह और श्री सूरी ने। दोनों ने एक सप्ताह तक यहां रुककर नागपुर से आए कुछ उपकरण यहां लगाए और ग्लोबल सिस्मिक नेटवर्क को कंप्यूटर में इनस्टाल किया। इसके बाद सिस्टम ने काम करना शुरू कर दिया। इसके बाद वे चले गए, लेकिन उनके जाने के कुछ ही दिनों बाद सिस्टम में खराबी आ गई और इसने काम करना बंद कर दिया।

केवल दस स्थानों में लगा है सिस्टम
बिलासपुर से पहले देश के महज नौ भूकंप वेधशालाओं में जीएसएन सिस्टम लगाया गया है। इसमें बोकारो, चेन्नई, विशाखापट्टनम, त्रिवेंद्रम, पूना, कराड(महाराष्ट्र), अजमेर, भुज और भोपाल शामिल है। यहां पहले से ही सिस्टम काम कर रहा है और यह सेंटर पूरी दुनिया के भूकंप वेधशालाओं से नेटवर्क के माध्यम से जुड़े हैं। बिलासपुर में सिस्टम लगने के बाद देश में जीएसएन सिस्टम वाली भूकंप वेधशालाओं की संख्या दस हो गई है।

सिस्टम की खासियत
भूकंप मापने के क्षेत्र में जीएसएन सिस्टम अब तक की सबसे लेटेस्ट तकनीक है। पूरी दुनिया के किसी भी कोने में भूकंप आए यह सिस्टम कुछ ही सेकंड में इसकी खबर वेधशाला में बैठे आपरेटर को दे देता है। इसके साथ ही अधिकारी अगर चाहें तो वेधशाला में बैठे-बैठे ही जापान, भूटान या कहीं भी आए भूकंप की तीव्रता को माप सकता है। छत्तीसगढ़ भूकंप के पांचवें जोन में आता है और यहां भूकंप आने की संभावना काफी कम है।

सिस्टम बंद है, अधिकारियों के आने के बाद यह चालू हो जाएगा। इस महीने के अंत तक दिल्ली ये टीम आने की उम्मीद है। भूकंप वेधशाला में सिस्टम बंद होने का असर नहीं पड़ा है।
- एनके साहू, मौसम वैज्ञानिक





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