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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. चुनावी वर्ष मे सरकार द्वारा सौगातों की बौछार अभी थमी नहीं है। राज्य शासन ने लंबे समय से आंदोलन कर रहे जनगणना कर्मचारियों को खुश करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उन्हें शिक्षाकर्मी (वर्ग-3) बनने का विकल्प दिया है। यह विकल्प न चुनने पर उन्हें पद रिक्त होने का इंतजार करना पड़ेगा। इस फैसले से करीब 500 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
वर्ष 1991 व 2001 के जनगणना कर्मचारी नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। दोनों वर्षो में हुई जनगणना के बाद प्रदेश में हजारों कर्मचारी आज भी बेरोजगार घूम रहे हैं। धरना-आंदोलनों के बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने शासन को निर्देश दिया था कि इन्हें रिक्त पदों पर भर्ती दी जाए, साथ ही रिक्त पदों की सूची भी मंगाई थी। इनमें से कुछ कर्मचारियों की सीधी भर्ती के बाद अब शासन ने जनगणना कर्मियों को शिक्षाकर्मी बनाने का निर्णय लिया है।
सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव वीके राय ने कलेक्टर को भेजे आदेश में कहा है कि सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति में कठिनाई आने के फलस्वरूप जनगणना से संबंधित अतिशेष कर्मचारियों को विकल्प के रूप में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के पद पर नियुक्ति दी जानी है। इसके लिए प्रक्रिया तय कर दी गई है, जिसके अनुसार संबंधित कर्मचारियों से पहले सहमति पत्र लिए जाएंगे।
उन्हें विकल्प चुनने के लिए 10 दिनों का समय दिया जाएगा। ऐसा नहीं है कि नौकरी का रास्ता इसके बाद बंद हो जाएगा। शासन ने कहा है कि विकल्प नहीं देने वालों को सहायक ग्रेड-3 के पद रिक्त होने तक इंतजार करना पड़ेगा। जिन कर्मचारियों से 30 सितंबर तक सहमति पत्र प्राप्त हो जाएगा, उनकी सूची जिले की जनपद पंचायतों को भेजी जाएगी, जहां शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के रिक्त पदों पर नियुक्ति संबंधी कार्रवाई की जाएगी।
यदि विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों की संख्या बिलासपुर जिले के अंतर्गत जनपदों की कुल रिक्तियों से अधिक है तो वरिष्ठता क्रम के अनुसार शेष कर्मचारियों की सूची संचालक पंचायत को भेजी जाएगी। वहां से यह सूची बिलासपुर के आसपास जिलों को भेजी जाएगी और इसकी सूचना संबंधित कर्मचारियों को दी जाएगी, ताकि वे जनपद पंचायत से संपर्क कर औपचारिक आवेदन देकर नियुक्ति आदेश प्राप्त कर सकें।
अधिकांश जनगणना कर्मियों की आयु सीमा शासकीय सेवा के मापदंडों के अनुसार अधिक हो चुकी है, लेकिन उन्हें छूट दी जाएगी। इस निर्णय के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से सैद्धांतिक सहमति ले ली गई है। कलेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
देना होगा वचन पत्र
जनगणना कर्मचारी यदि शिक्षाकर्मी बनना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी सहमति के अलावा वचन (अंडरटेकिंग) पत्र भी देना पड़ेगा कि उन्हें शिक्षाकर्मी बनाए जाने के बाद वे आगे और किसी पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं देंगे। सहमति पत्र के साथ उनकी शैक्षणिक योग्यता संबंधी प्रमाण-पत्र भी लिए जाएंगे।
500 कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
अविभाजित बिलासपुर जिले में तकरीबन 500 जनगणना कर्मचारी हैं, जिन्हें शासन के इस फैसले का लाभ मिल सकता है। पूर्व में 110 कर्मचारियों की सूची शासन को भेजी गई थी, जिनमें से करीब 30 को नियुक्ति मिल चुकी है। वर्ष 1991 की सूची के अनुसार अविभाजित जिले में 315 सामान्य, 244 पिछड़ा वर्ग, 74 अनुसूचित जाति व 49 अनुसूचित जनजाति के, इस तरह कुल 682 जनगणना कर्मचारी थे। इनमें से कुछ की मृत्यु हो चुकी है, वहीं कुछ की शासकीय नौकरी लग गई है।