जालंधर. आर्थिक संकट से जूझ रही बादल सरकार अब सरकारी जमीनें बेच कर विकास कार्य करने की तैयारी में है। सरकार के पास विकास कार्यो के लिए पैसा नही है। लोकसभा चुनाव की आहट ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।
अकाली-भाजपा गठजोड़ के विधायकों ने भी सरकार पर विकास कार्यो के लिए फंड जारी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सरकार की परेशानी को दूर करने का जिम्मा पुडा ने उठाया है।
पुडा ने 79 जमीनों की पहचान की है। इनको बेचकर पुडा ने 2500 से 3000 करोड़ रूपए कमाने का टारगेट रखा है। अब तक 30 जमीनों को बेचकर पुडा 700 करोड़ कमा चुकी है।
अमृतसर के मैंटल हॉस्पिटल की जमीन 180 करोड़ में बिकी है। कई बड़ी कंपनियां सरकारी जमीने खरीदने की ताक में हैं। अब पुडा का ध्यान इन जमीनों को दो माह के बीच में बेचने का है।
स्थानीय निकाय विभाग भी पुडा के रास्ते पर
स्थानीय निकाय विभाग भी अब पुडा के रास्ते पर चलने की तैयारी में है। चुंगी समाप्ति के कारण विकास कार्यो के लिए निगमों के पास पैसा नहीं बचा है। लोस चुनाव नजदीक होने के कारण सरकार चाह कर भी फिर से चुंगी नही लगा सकती है।
गठजोड़ को डर है कि अगर चुंगी फिर से लगाई गई तो शहरी वोट बैंक गठजोड़ से नाराज हो जाएगा। इसलिए स्थानीय निकाय विभाग ने भी शहरों में खाली पड़ी अपनी जमीनें बेचने का फैसला कर लिया है।
हालांकि स्थानीय निकाय विभाग के लिए यह काम उतना आसान नही है, क्योंकि निगमों में बीते कई साल से इन जमीनों का रिकॉर्ड अपडेट नही है। इस बारे एक निगम कमिश्नर ने बताया है कि अब तक जमा किए तथ्यों से यह खुलासा हुआ है कि 45 प्रतिशत जमीनों पर लोगों ने कब्जे किए हुए है।
अकाली -भाजपा की अंदर की बात
अंदर की बात तो यह है कि विकास कार्य न होने के कारण गठजोड़ के विधायक खासे नाराज है। फलस्वरुप भाजपा को डर है कि लोस चुनाव में इसका खमियाजा उठाना पड़ सकता है, इसलिए भाजपा की तरफ से सरकार पर विकास कार्यो के लिए फंड जारी करने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
भाजपा के एक विधायक ने बताया है कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को यह स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अब वह और इंतजार नही कर सकते। उनकी साख दांव पर लगी हुई है, इसलिए सरकार को अब फौरन पैडिंग पड़े विकास कार्यो को पूरा करना होगा।
पुडा ने 79 जमीनों की पहचान की है उनसे 30 बेचा जा चुका है। शेष को बेचने की प्रक्रिया शुरू की गई है। -सोमप्रकाश, मुख्य प्रशासक पुडा