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छह को फांसी, दो दोषियों को उम्रकैद

भंडारा.बहुचर्चित खैरलांजी हत्याकांड में महाराष्ट्र के भंडारा जिले की कोर्ट ने छह दोषियों को फांसी जबकि दो अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। भंडारा जिले की इस घटना में दलित परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। फस्र्ट एडीशनल सेशन जज एसएस दास ने हत्याकांड के दो साल पूरे होने से पांच दिन पहले सजा का फैसला सुनाया है।

फैसला क्यों है अहम :

देशभर में आए दिन दलित अत्याचार के कथित मामले सामने आते रहते हैं। खैरलांजी हत्यकांड में तेज गति से आए इस फैसले के बाद अब अत्याचार के मामलों पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

फांसी : शत्रुघ्न धांडे, विश्वनाथ धांडे, प्रभाकर मंडलेकर, जगदीश मंडलेकर, राम धांडे और सक्रू बिंजेवार।

उम्रकैद : गोपाल बिंजेवार और धरम धांडे।

जुर्माना:

आठ दोषियों को दो-दो हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा है। उम्रकैद पाए दो दोषियों पर एक-एक हजार अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है।

पिछले हफ्ते ठहराया था दोषी :

कोर्ट ने पिछले हफ्ते सोमवार को मामले के कुल 11 आरोपियों में से इन आठ आरोपियों को दोषी ठहराया था। वहीं, तीन अन्य आरोपियों महिपाल धांडे, शिशुपाल धांडे और पुरुषोत्तम तितरमारे को बरी कर दिया था। दलित परिवार के चार सदस्यों की हत्या का मामला

मामले ने तूल पकड़ा :

शुरुआत में इसे ग्रामीणों के बीच आपसी झगड़ा माना गया, लेकिन बाद में इस हत्याकांड ने दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामले के रूप में तूल पकड़ लिया। नागपुर व राज्य के अन्य इलाकों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

पुलिस ने शुरुआत में 47 लोगों को गिरफ्तार किया था, मगर सीबीआई ने इनमें से 11 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए और शेष 36 को छोड़ दिया गया।

भैयालाल ने जताया संतोष : अपने चार परिजनों को खो चुके भैयालाल ने मामले के आरोपियों को सुनाई गई सजा पर संतोष जताया है।

फैसला ऐतिहासिक : ‘यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इससे राज्य में दलित अत्याचार के खिलाफ एक सख्त संदेश जाएगा।’-

आरआर पाटील, उपमुख्यमंत्री, महाराष्ट्र

यह अन्याय है :

‘यह अन्याय है, क्योंकि 47 आरोपियों में से केवल आठ को सजा मिली है। इसके खिलाफ हमारा आंदोलन जारी रहेगा’

- शशि गावड़े, राज्य सचिव, नेशनल रिपब्लिकन पार्टी





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