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निष्कासन दुर्भाग्यपूर्ण : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली.पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब सरकार और विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है। अमरिंदर ने अपनी याचिका में पंजाब विधानसभा द्वारा अपने निष्कासन को चुनौती दी हुई है। नोटिस जारी करने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मामला संविधान से जुड़ा होने के कारण इसे तीन सदस्यों की बड़ी बेंच के सामने पेश किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसबी सिन्हा और जस्टिस सिरियाक जोसेफ की बेंच ने विधानसभा सचिव, केंद्रीय चुनाव आयोग और अटॉर्नी जनरल मिलन बनर्जी के नाम भी नोटिस जारी किया है।

कैप्टन अमरिंदर के निष्कासन को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वह संविधान की धारा 32 के तहत भी सीधे सुप्रीम कोर्ट की शरण ले सकते थे।

उल्लेखनीय है कि अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के लेन-देन में गड़बड़ी के आरोपों के चलते पंजाब विधानसभा ने अमरिंदर के खिलाफ विशेष जांच कमेटी नियुक्त की थी। इसकी रिपोर्ट आने के बाद अमंिरंदर को निष्कासित कर दिया गया था।

हाईकोर्ट के फैसले को भी चुनौती

याचिका में अमरिंदर ने 10 सितंबर 2008 के नोटिफिकेशन के जरिये विधानसभा से अपने निष्कासन के साथ ही उनकी विधानसभा सीट (पटियाला) को रिक्त घोषित किए जाने को चुनौती दे रखी है।

याचिका में मामले की सुनवाई को एक दिसंबर तक टालने के हाईकोर्ट के फैसले को भी चुनौती दी है। याचिकाकर्ता के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला आ जाने से हाईकोर्ट में चल रहा मामला बेमानी हो जाएगा।

अमरिंदर की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील यूयू ललित ने कहा कि अमरिंदर के खिलाफ कार्रवाई मुख्यमंत्री बादल के इशारों पर की गई थी।

इसके लिए विधानसभा में अकाली दल-भाजपा गठबंधन के बहुमत का खुलकर इस्तेमाल किया गया। वरिष्ठ वकीलों ललित और अभिषेक मनु सिंघवी ने विधानसभा और उसकी विशेष कमेटी के ही कानून में तय आपराधिक कानूनों से ऊपर उठकर जांचकर्ता, मामले की कार्यवाही चलाने वाले और फैसला सुनाने वाला बनने पर हैरानी जताई।

वरिष्ठ वकीलों ने जानना चाहा कि क्या अपनी कार्यवाही को सही ठहराने के लिए राज्य विधानसभा सुप्रीम कोर्ट के राजा रामपाल विरुद्ध लोकसभा अध्यक्ष के मामले को आधार बना सकती है।





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