bhaskar Web English
HomeVichaar Vichaar

बुखार का चुनाव, चुनाव का बुखार

मुझे सिर्फ हल्का सा बुखार आया था। बुखार इतना कम था कि पत्नी भी रोजमर्रा के घरेलू कामों से मुझे छुट्टी देना गवारा न करती। मगर सुबह-सुबह अचानक नेताजी तबीयत पूछने घर पर आ धमके।

खीसे निपोरते हुए कहने लगे- ‘शाम को शर्माजी ने बताया कि दुश्मनों की तबीयत कुछ नासाज है। मैंने सोचा पूछता चलूं।’ और फिर चाय की चुस्कियों के बीच दसियों बार कह डाला ‘मेरे लायक कोई काम हो तो जरूर बताना।’

नेताजी तो तबीयत पूछकर चलते बने मगर मुझे टेंशन में डाल गए। आखिर ऐसा क्या हो गया जो नेताजी का इस कदर हृदय परिवर्तन हो गया। इलेक्शन के बाद से तो उनके दर्शन सिर्फ ‘आभार, बधाई, आभार’ के विज्ञापनों और किसी भी ऐरे-गैरे के जन्मदिन की बधाई देने वाले पोस्टरों पर ही होते थे।

खुद चलकर मुझ जैसे तुच्छ और तथाकथित बुद्धिजीवी की तबीयत पूछने आए। क्योंकि मैंने सुना था कि मन ही मन नेताजी बुद्धिजीवियों को अच्छा इनसान नहीं मानते। उनका कहना है कि यह लोग जब तक राजनीति में दिलचस्पी न लें तभी तक अच्छे लगते हैं। जहां इन्होंने वोट देने की ठानी कि खेल बिगाड़ते हैं।

ऐसा नहीं है कि इस दौरान मुझे उनसे कोई काम नहीं पड़ा या मैंने मिलने की कोशिश नहीं की। चुनाव के वक्त जो मोबाइल नंबर उन्होंने मुझे दिया था, वह उन्होंने कभी उठाया नहीं।

हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया था कि इस नंबर पर उन्हें आधी रात को भी फोन कर सकते हैं। रात हो या दिन मोबाइल पर हमेशा उनके किसी गुर्गे की ही आवाज सुनाई दी ‘भैय्या मंत्रीजी के साथ हैं। आप बाद में फोन लगाइए।’ इलाके में जो उनका दफ्तर था वहां उनके मिलने का समय जरूर बोर्ड पर लिखा हुआ था मगर कभी नेताजी दफ्तर में मिले नहीं।

चुनाव जीतने के कुछ ही दिनों बाद मेरा राजधानी जाना हुआ तो मैंने सोचा कि चलो नेताजी से मिलते चलें। मगर कई स्लिपों पर नाम, पता और मिलने का उद्देश्य लिखने के बावजूद नेताजी नहीं मिले तो नहीं मिले। हर समय यही जवाब मिलता कि वे मीटिंग में हैं।

सप्ताह के अलग-अलग दिनों, अलग-अलग समय पर मिलने की लाख कोशिशें बेकार गईं। कभी नेताजी दिल्ली गए हुए मिले तो कभी क्षेत्र के दौरे पर। कई बार तो मुझे शक भी होने लगा कि नेताजी जहां से चुनाव जीते हैं कहीं वह क्षेत्र किसी और शहर में तो नहीं है।

क्योंकि जिस क्षेत्र में मैं रहता हूं वहां न तो नेताजी नजर आए न ही चुनाव के दौरान उन्होंने जो वादे किए थे उनके पूरा होने के कोई आसार। बीच में जब-जब भी मुझे वक्त मिलता तो मेरे लिए यह याद करना एक अच्छा टाइमपास रहता कि चुनाव जीतने से पहले नेताजी ने क्या-क्या वादे किए थे और उनमें से कौन-कौन से पूरे हुए हैं। मुझे पूरे हुए वादे याद करने में दिमाग पर कभी जोर नहीं डालना पड़ा, क्योंकि वे नहीं के बराबर ही थे।

नेताजी से मुलाकात के मामले में शर्माजी बड़े किस्मत वाले हैं। चुनाव जीतने के बाद दो-तीन बार उन्हें नेताजी दिखाई पड़ गए। एक बार तो मुलाकात भी हो गई। एक शोक सभा में मरने वाले को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद नेताजी को कुछ समय मिला तो शर्माजी ने उन्हें आदरपूर्वक नमस्कार किया और शिकायती लहजे में बोले- ‘क्या बात है भैय्या, आजकल तो नमस्कार का जवाब भी नहीं देते।’

नेताजी के चेहरे पर उभरे सवाल को शर्माजी ने ताड़ लिया और उन्हें बताया- ‘कल जब आप मंत्रीजी के साथ कार में जा रहे थे तब मैंने नमस्कार किया था।’

नेताजी ने कुछ नाराजी भरे लहजे में कहा- ‘मंत्रीजी के साथ कार में जाते वक्त कैसे जवाब दे सकता हूं? कल को तो मैं प्रधानमंत्री के साथ हवाई जहाज में जाता रहूंगा तो भी आप बोलोगे नमस्ते का जवाब नहीं दिया।’

शर्माजी के साथ गुजरे इस हादसे को याद करके मैं हैरत में था कि जिन नेताजी को खुद अपनी शोक सभा में जाने का वक्त नहीं वह उस शोक सभा में कैसे पहुंचे? और फिर उसके बाद मेरी तबीयत पूछने भी चले आए। इतने दिनों से मैंने उनके बारे में जो भी गलत-गलत सोचा था उस पर मुझे ग्लानि हुई।

मैंने अपने आप को कोसा कि आखिर इतने बड़े नेता हैं। देश और प्रदेश की बड़ी-बड़ी योजनाओं पर काम करें या छोटे-छोटे लोगों की छोटी-मोटी समस्याओं पर ध्यान देते फिरें। और फिर जब वक्त मिलता है तो हर जगह पहुंचते ही हैं।

आखिर मेरी तबीयत देखने भी आए कि नहीं। नेताजी जैसे कागजी पुल खड़े करने में माहिर हैं वैसे ही मैं मन ही मन उनकी तारीफों के पुल बांध रहा था कि झूठी प्यालियां उठाने मेरी पत्नी कुछ बड़बड़ाती हुई आई।

मैंने गौर से सुना तो कह रही थीं- ‘इतने दिनों नजर नहीं आए। अब चुनाव सर पर आ गए हैं तो चले आए तबीयत पूछने।’ अब मेरी समझ में सारा मामला नेताजी की पोशाक की तरह साफ हो गया।

चुनाव आ रहे हैं इसलिए मेरे मामूली बुखार की पूछताछ करने का समय भी उन्हें मिल गया। वरना मेरे मरने की खबर भी नेताजी को शायद नहीं मिलती।

-लेखक ‘दैनिक भास्कर’ इंदौर में डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। adil_q@mp.bhaskarnet.com





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: