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40 फीसदी युवा शक्ति तय करेगी चुनाव की दिशा

18 साल पूरा करने वाली सूबे की नई पीढ़ी प्रदेश के कर्णधारों का चयन करने को बेताब है। खनिज के मामले में सबसे धनाढ्य माने जाने वाले छत्तीसगढ़ में 40 प्रतिशत नई पौध अपने वोट से सरकार चुनने के लिए तैयार है।

राज्य के कुल मतदाताओं में से 3 लाख यानी लगभग 2 फीसदी लोग पहली बार सरकार चुनने बूथ तक जाएंगे। 30 सितंबर तक नई वोटर लिस्ट बनने के बाद इस संख्या में इजाफा हो सकता है। युवाओं की इच्छानुसार सभी बड़े दल नए चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। क्या चाहते हैं वह युवा जो पहली दफा वोट देंगे?

पिछले चुनावों पर नजर डालें तो जीत-हार का फैसला 2-3 फीसदी वोटों से होता रहा है। नए वोटरों को रिझाने वाली पार्टी सत्ता का स्वाद चख सकती है, लेकिन इसके लिए उसे नए वोटरों की भावनाओं और अपेक्षाओं पर खरे उतरने का भरोसा दिलाना होगा।

सूबे की इस नई पीढ़ी के लिए प्रत्याशी का बैकग्राउंड काफी मायने रखेगा। उसकी आर्थिक स्थिति से ज्यादा उसका चरित्रवान, शिक्षित, सामाजिक कार्यकर्ता, आपराधिक छवि वाला न होना ज्यादा जरूरी है।

यह भी अपेक्षा है कि वह चुने जाने के बाद अपनी प्रशंसा करवाने की बजाए 5 सालों तक जनता के हित और क्षेत्र के विकास के बारे में काम करे। वर्ष 2003 में युवा मतदाताओं की कुल संख्या 1,35,41,199 थी जबकि यह संख्या बढ़कर अब 1,52,58,881 हो गई है।

राज्य में 18 से 25 साल के मतदाताओं ज्यादातर कालेज स्टूडेंट हैं। इनकी संख्या करीब 25 लाख है। यह कुल मतदाताओं का 20 फीसदी है। इसी तरह 25 से 35 वर्ष वाले युवा मतदाता जो नौकरी भी करते हैं करीब उतने ही हैं। दोनों मिलाकर कुल मतदाओं का 40 प्रतिशत होता है। यह आंकड़ा किसी भी दल को सत्ता सौंपने या बेदखल करने के लिए काफी माना जा सकता है।

नए चेहरों को महत्व : कांग्रेस

कांग्रेस में एंटोनी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर टिकट बंटी तो युवाओं को तरजीह मिलना तय है।

पार्टी प्रवक्ता इकबाल अहमद रिजवी का कहना है कि नए चेहरों को महत्व दिया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि उनमें जीतने योग्य प्रत्याशी हों। पार्टी के प्रति उनकी सेवाएं और बायोडाटा भी महत्व रखेगा। श्री रिजवी नए मतदाताओं को काफी उपयोगी मानते हैं। उनका कहना है कि इनको खुश कर लिया तो बड़ा मैदान मार लिया समझो।

नए मतदाताओं का सम्मान

नए मतदाताओं का महत्व समझकर भाजयुमो ने तो उनके लिए सम्मान समारोह आयोजित करने शुरू कर दिए हैं। भाजपा प्रवक्ता सरोज पांडे मानती हैं कि ऐसे आयोजन को अच्छा रिस्पांस मिला है। उन्होंने कहा कि पिछली दफा युवा प्रत्याशियों के दम पर सरकार बनाकर देख लिया कि नए चेहरों को लोग पसंद करते हैं। इस बार भी कुछ नए उम्मीदवार मैदान में उतारे जा सकते हैं।

बसपा में नए उम्मीदवार ज्यादा बसपा ने अपने सभी 90 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इनमें युवा और पहली बार चुनाव लड़ने वालों की बहुतायत है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी सेवाराम ने कहा कि युवा और बूढ़े सभी बसपा परिवार के हैं। इसलिए उनमें समन्वय बनाकर रखना जरूरी है। युवा आगे बढ़ेंगे तो फर्क तो पड़ेगा ही।

छात्रा हेमानी सिंह ने कहा कि उन्हें अब आभास हो रहा है कि एक वोट कितना कीमती होता है। वे ऐसे प्रत्याशी को वोट देंगी जो ईमानदार और प्रदेश के हित में सोचता हो। उसे अधूरी योजनाएं पूरी करने के साथ अपनी प्रशंसा में जुटने के बजाए फिजूलखर्ची रोकना चाहिए। कालेज स्टूडेंट अनुजा पालेकर चाहती हैं उनके वोट का सही उपयोग हो सके।

प्रत्याशी की छवि खराब न हो। बीएससी बायोटेक की स्टूडेंट रिया करीम मानती है कि सरकार बनाने में भागीदारी होना अपने आपमें अद्भुत अनुभव है। वे ऐसे व्यक्ति को विधायक को चुनेंगी जो ईमानदार, पढ़ा लिखा, जनता के दुख-दर्द में शामिल होने वाला हो।

शिक्षा, लाइब्रेरी, विकलांगों की पढ़ाई की व्यवस्था और विश्वविद्यालयों में रोजगारमूलक कोर्स को बढ़ावा देने के साथ ट्रैफिक सुधार करे और भ्रष्टाचार पर रोक लगाए।

क्रिकेट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वजहात रिजवी पहली बार वोट देने पर गर्व महसूस कर रहे हैं। वे ऐसा विधायक चुनना चाहते हैं जो भले ही मंत्री न बन पाए लेकिन जुझारूपन से क्षेत्र के विकास कार्य करवा ले। उनका कहना है कि क्रिकेट स्टेडियम बना लेना बड़ी बात नहीं बल्कि उसकी सुरक्षा करना है।

बीकाम स्टुडेंट संदीप त्रिपाठी पहली बार वोट देकर बुरे वक्त में साथ देने वाले व्यक्ति को चुनेंगे। वे सरकार से अपेक्षा करते हैं कि विकास और रोजगार को प्राथमिकता दे। एक्जीक्यूटिव जीशान अहमद कुरैशी पहली मर्तबा वोट देने पर कहते हैं कि अब लग रहा है कि में मुझे नागरिकता मिल गई है। मेरा विधायक समाज में बदलाव व तरक्की की सोच वाला होगा जो प्रदेश को यूरोप की टक्कर का बनाएगा।

स्टुडेंट लीडर व फुटबाल खिलाड़ी मो. खालिद पहली बार वोट देकर युवा विधायक चुनना चाहते हैं, जो छात्रों की समस्याओं का निराकरण कर सके और टैफिक सुधारे। कंप्यूटर इंजीनियरिंग छात्र अभिजात सक्सेना, प्रतीक सग्गर, पंकज जस्सानी, अंजलीमाला दास, ईशा प्रकाश आदि भी प्रत्याशी की छवि और जुझारुपन को महत्व देते हैं।

युवा ही युवा

2003 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने युवाओं को सबसे अधिक टिकट दी। 90 सीटों में करीब 80 फीसदी पर 25 से 40 साल के युवाओं को टिकट दी गई इनमें से 34 जीतकर आए। उनमें पिंकी ध्रुव (26 साल) सबसे कम उम्र की थीं, जिन्होंने धाकड़ मंत्री माधवसिंह ध्रुव को पटकनी दी। मंत्रिमंडल में भी युवाओं को जगह मिली।

एक तरह से रमन मंत्रिमंडल को युवाओं का मंत्रिमंडल कहा जा सकता है। कांग्रेस ने भी इस उम्र के 50 फीसदी लोगों को टिकट दी जिसमें से केवल 11 ही जीत सके। देवव्रत सिंह (33) और अमरजीत भगत (33) सबसे कम आयु के थे। कांग्रेस में युवा विधायकों की ज्यादा पूछ परख नहीं हुई। एनसीपी के एकमात्र विधायक नोबेल वर्मा (41) जीते। वे पूरे कार्यकाल में सदन में काफी मुखर रहे।

बसपा ने दो सीटें जीतीं। दोनों ही युवाओं कामदा जोल्हे (31) और लालसाय खुटे (40) के खाते में गई। हालांकि उनमें से श्री खुटे को अदालत के फैसले की वजह से पद छोड़ना पड़ा, लेकिन कु. जोल्हे ने पार्टी की उपस्थिति सदन में दर्ज कराई।

टिकट पर टकटकी

उम्मीदवारों के बारे में युवाओं ने जो मापदंड तय किए हैं वे भाजपा ने पहले ही शामिल कर लिए हैं। हमारी सरकार ने हजारों युवाओं को शिक्षाकर्मी, पुलिस, स्वरोजगार योजनाओं आदि के तहत रोजगार उपलब्ध कराए हैं।- विष्णुदेव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

कांग्रेस ने युवाओं और नए मतदाताओं की पसंद को ध्यान मे रखकर ही बेहतर उम्मीदवार चयन करने सूची बनाई है। युवा और बेदाग लोगों को टिकट दी जाएगी। जनता की समस्याओं को दूर करने का माद्दा रखने वाले को तरजीह दी जाएगी।

- धनेंद्र साहू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष,

बसपा ने 99 फीसदी टिकट युवाओं, शिक्षितों और बेदाग छवि वालों को ही दिया है। ज्यादातर पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं और कुछ नए मतदाता ऐसे ही उम्मीदवारों को पसंद करेंगे। - दाऊराम रत्नाकर, बसपा प्रदेश अध्यक्ष





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