नागपुर.
पचास साल के शशांक मनोहर ने शनिवार को जब शरद पवार के स्थान पर बीसीसीआई का अध्यक्ष पद संभाला, तब उन्होंने वो मुकाम हासिल किया, जो उनके पिता नहीं पा सके थे।18 साल पहले शशांक के पिता वीआर मनोहर ने बोर्ड उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। देश के मशहूर वकील वीआर मनोहर 1990 के कोलकाता में हुए चुनाव में खड़े हुए थे।
उस चुनाव में न केवल मतदाताओं को धमकी दी गई थी, बल्कि उड़ीसा के एक प्रतिनिधि को मीटिंग से बाहर करते हुए उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को बिठा दिया गया था। उस समय केंद्रीय मंत्री रहे माधवराव सिंधिया ने अध्यक्ष पद के चुनाव में बीआर दत्त को हराया था, जबकि मनोहर को एडब्ल्यू कनमडीकर के खिलाफ एक वोट से हार झेलनी पड़ी थी। आज जब उनके बेटे शशांक दुनिया के सबसे अमीर बोर्ड के अध्यक्ष हैं, तो उनके लिए इससे बड़ी गर्व की बात कुछ नहीं हो सकती।
मोबाइल फोन नहीं रखते शशांक
आज जब मोबाइल फोन जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, तो लोगों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि शशांक मोबाइल फोन नहीं रखते हैं। उन्होंने पासपोर्ट भी पिछले साल ही बनवाया है। मीडिया से कम बात करने वाले शशांक ने तीन साल पहले जगमोहन डालमिया को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
क्रिकेट और वकालत से गहरा नाता
मनोहर खानदान का क्रिकेट और वकालत से गहरा नाता है। वीआर मनोहर, शशांक, उनसे छोटा लड़का और शशांक का बेटा, सभी प्रमुख वकील हैं।
वीआर विदर्भ क्रिकेट संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि अभी यह जिम्मेदारी शशांक संभाल रहे हैं। शशांक ने ओपनर के रूप में नागपुर यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व किया था और प्रथम श्रेणी क्रिकेट भी खेला है।