क्या आप ऐसी कर योजना बनाना चाहते हैं, जो आपको अधिक से अधिक आयकर बचाने में मददगार साबित हो? तो इसके लिए आपको इस योजना में अपनी पत्नी को भी शामिल करना होगा।
भारतीय कर कानूनों मंे महिलाओं के लिए ऐसे कई विशेष प्रावधान हैं जिनका इस्तेमाल करके आयकर की अच्छी-खासी बचत की जा सकती है।
चालू वित्त वर्ष में प्रत्येक करदाता महिला को आयकर में एक लाख 80 हजार रुपए तक की छूट दी गई है। याद रखें यह छूट अलग से दी गई है, यानी पति या परिवार के अन्य सदस्यों की आय से इसका कोई लेना-देना नहीं है।
इसलिए महिला की अलग से टैक्स फाइल बनवाकर कर-छूट का फायदा उठाया जा सकता है। ऐसी महिला को आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत वे सभी लाभ मिलेंगे जो उनके पति या परिवार के अन्य सदस्यों को मिलते हैं।
यानी बीमा के प्रीमियम, बच्चों की शैक्षणिक फीस, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) इत्यादि में सालाना एक लाख रुपए तक के खर्च या निवेश पर उसे कर-छूट मिलेगी।
यही नहीं, खुद के नाम पर होम लोन लेने पर ब्याज के भुगतान के रूप मंे भी उसे डेढ़ लाख रुपए तक की राशि पर कर-छूट मिल सकेगी। खास बात यह है कि यह लाभ महिला के पति या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा छूट का दावा करने के बाद भी उसे मिलेंगे।
महिला करदाताओं को याद रखना चाहिए कि अगर उनकी कुल आय छूट सीमा से नीचे है तो उन्हें रिटर्न भरने की भी जरूरत नहीं है। संपत्ति कर कानून के तहत भी महिला करदाताओं के लिए अलग से प्रावधान है। उन्हें तब तक संपत्ति कर रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है जब तक कि उनकी कुल करयोग्य संपत्ति 15 लाख रुपए से अधिक नहीं है।
यदि किसी महिला के नाम पर 15 लाख रुपए से अधिक मूल्य की ज्वेलरी है तो इस स्थिति में उसे खुद अपने नाम पर संपत्ति कर रिटर्न भरना चाहिए। हमारे यहां संपत्ति कर की दर महज एक फीसदी है। इसलिए संपत्ति कर रिटर्न में महिलाओं को अपनी ज्वेलरी का भी उल्लेख कर अनावश्यक तनाव से बचना चाहिए।
साथ ही उन्हें अपनी ज्वेलरी का मूल्यांकन भी समय-समय पर करते रहना चाहिए। इसी प्रकार पुरानी ज्वेलरी बेचते समय पूंजीगत लाभ के पहलू को भी दिमाग में रखना चाहिए। याद रखें कि पुरानी ज्वेलरी को बेचकर प्राप्त धनराशि से नई ज्वेलरी खरीदने पर पूंजीगत लाभ कर से नहीं बचा जा सकता।
टैक्स प्लानिंग के तीन सूत्र
1. पति, ससुर या सास से उपहार नहीं लें, क्योंकि आयकर अधिनियम की धारा 64 के तहत इस उपहार से अर्जित आय उपहार देने वाले की आय में जुड़ेगी, न कि महिला की आय में। इससे टैक्स प्लानिंग गड़बड़ हो सकती है।
2. महिला चाहे तो अपने वयस्क बेटे या अपने पिता या भाई से उपहार ले सकती है। इससे उसकी आय का स्रोत बढ़ेगा और टैक्स प्लानिंग में मदद मिलेगी। याद रखें कि बेहतर टैक्स प्लानिंग के लिए करदाता महिला के नाम पर ऐसा फंड जरूर होना चाहिए जिससे वह नियमित आय अर्जित कर सके।
3. पति से उपहार नहीं, ब्याजयुक्त लोन लें। इस लोन से निर्मित मकान से अर्जित आय पत्नी की मानी जाएगी। इससे मुखिया का कर दायित्व कम होगा। लोन पर ब्याज का भुगतान जरूर करें। चुकाए गए ब्याज पर आयकर कटौती का दावा किया जा सकेगा। यानी बचत ही बचत।
(लेखक जाने-माने कर व निवेश विशेषज्ञ हैं।)