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फ्रांस के सथ हो सकता है एटमी करार

मार्सेल (फ्रांस).भारत और फ्रांस आपस में ठीक वैसा ही असैन्य परमाणु करार करने को बेताब हैं, जैसा भारत व अमेरिका के बीच हुआ है। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने सोमवार को पर्याप्त संकेत दिए कि फ्रांस के साथ मंगलवार को असैन्य परमाणु सहयोग संबंधी कोई करार संभव है।

प्रधानमंत्री ने सरकोजी के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हमारा देश असैन्य परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के संबंध में दुनिया के तमाम देशों से सहयोग चाहता है। अमेरिकी कांग्रेस अभी एक विधेयक पारित करने की प्रक्रिया में व्यस्त है, जिससे अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।’

सिंह ने बताया कि मंगलवार को फ्रांस के साथ हमारी शिखर बैठक है। मुझे आशा है कि कुछ नतीजा इस बैठक में आएगा। उन्होंने यह जानकारी इस सवाल के जवाब में दी कि क्या मंगलवार को भारत फ्रांस के साथ असैन्य परमाणु सहयोग पर दस्तखत करेगा।

सरकोजी ने कहा, ‘ऐसे वक्त में जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के बारे में बात कर रही है तो यह स्वीकारने की जरूरत है कि ऊर्जा का स्वच्छतम रूप परमाणु ऊर्जा है।’ उन्होंने कहा कि वे परमाणु सहयोग के मुद्दे पर मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री के साथ चर्चा के बाद कोई फैसला लेंगे।

ईरान के प्रति संतुलन:

ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उसके महत्वाकांक्षी परमाणु कार्यक्रम का समर्थन नहीं करेगा।

फिर भी उन्होंने संतुलन बनाने के लिहाज से कहा कि ईरान अप्रसार संधि का हस्ताक्षरी है और अपने असैनिक परमाणु कार्यक्रम के विकास की जरूरतें पूरा करने का हकदार है।

पाक-अफगान सीमा:

सिंह और सरकोजी ने नौंवे भारत-यूरोपीय संघ सम्मेलन में भाग लिया। इसके समापन पर जारी संयुक्त विज्ञप्ति में तनावग्रस्त पाक-अफगान सीमा पर बिगड़ते सुरक्षा हालात पर चिंता जताई गई और तेजी से बदलते हालात से निपटने के लिए जरूरी कार्रवाई करने की मांग की गई।

फ्रांस से करार का महत्व

फ्रांस से करार होना परमाणु क्षेत्र में भारत के 34 वर्र्षो से चले आ रहे अलगाव को खत्म करने का संकेत होगा। दोनों देशों ने करार के प्रारूप पर जनवरी में ही काम शुरू कर दिया था। लेकिन 45 देशों के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से भारत को रियायत नहीं मिलने से इस पर हस्ताक्षर नहीं हो सके थे। अब एनएसजी की रजामंदी के बाद भारत और फ्रांस आपस में समझौता कर सकते हैं।





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