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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
नए जमाने के साथ-साथ चलते रहना अच्छा काम है लेकिन इस राह पर चलते हुए अपने मूल्यों को भूल जाना गलत है, यह सोच सुधा मूर्ति ( ऑथर और सोशल वर्कर) की है। अपने पति नारायण मूर्ति के नाम का सहारा न लेते हुए सुधा मूर्ति ने अपनी अलग पहचान बनाई है।
इंफोसिस फाउंडेशन की फाउंडर का पद संभालने के बावजूद वह जमीन से जुड़ी इंसान हैं। मंगलवार को ब्रिटिश लाइब्रेरी-9 में स्पेशल लेक्चर के लिए वह चंडीगढ़ पहुंची। उन्होंने राइटिंग स्किल के बारे में लोगों को बताया।
सामाजिक मुद्दों पर लिखना पसंद
सुधा मूर्ति ने बताया कि उन्हें सामाजिक मुद्दों पर लिखना बहुत पसंद है। वह हमेशा अपने आस पास के एन्वॉयरमेंट से प्रभावित होकर लिखती हैं। सुधा का मानना है कि लोग वह पढ़ना चाहते हैं, जिससे वह अपने आप को जोड़ सकें।
अब तक सुधा करीब 20 किताबें अंग्रेजी और कन्नड में लिख चुकी हैं। जिनके अनुवाद कई बड़ी भाषाओं में किए जा चुके हैं। इनमें 9 नॉवल्स, 4 टेक्निकल, तीन ट्रैवल लॉग, तीन नॉन फिक्शन और एक शॉर्ट स्टोरीज किताब शामिल हैं।
टाटा जॉइन करने वाली पहली महिला
एमटेक कर चुकी सुधा मूर्ति टाटा फर्म टेल्को में पहली डेवलपमेंट इंजीनियर थीं। इस जॉब को जॉइन करने का किस्सा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि, न्यूजपेपर में टाटा कंपनी ने इंजीनियर की पोस्ट के विज्ञापन में सिर्फ पुरुषों के लिए लिखा तो मुझे गुस्सा आ गया।
सुधा मूर्ति ने जेआरडी टाटा को पोस्ट कार्ड लिख भेजा कि वह महिलाओं के साथ इस तरह का भेद-भाव कैसे कर सकते हैं। जेआरडी टाटा ने जब सुधा मूर्ति का पोस्ट कार्ड पढ़ा तो उन्हें हैरानी हुई और सुधा को स्पेशल इंटरव्यू के लिए बुलाया। इंटरव्यू में सुधा की प्रेजेंटेशन से जेआरडी काफी प्रभावित हुए और उन्हें जॉब दे दी।
राइटिंग के लिए चाहिए खास ध्यान
एक लेखक को सबसे ज्यादा ध्यान अपने शब्दों पर देना चाहिए ताकि उसकी स्टोरी पढ़ते वक्त लोगों को डिक्शनरी का सहारा न लेना पड़े। जब तक लेखक खुद को अपनी स्टोरी में इन्वॉल्व नहीं करेगा तब वह अपनी स्टोरी के साथ न्याय नहीं कर सकता।
सुधा मूर्ति ने इस बात पर भी जोर दिया कि नई जनरेशन वेस्टर्न कल्चर को अपनाते हुए वैल्यूज को भूल रही है। पहले लोग फैमिली के बारे में पहले सोचते थे, अब करिअर बनाने की दौड़ में फैमिली को पीछे छोड़ रहे हैं।