रेवाड़ी.
उसकी उम्र जब परिवार के लिए सहयोगी बनने की है तब मानसिक बीमारी ने उसे जंजीरों में कैद करा दिया है। यह दास्तां है 25 वर्षीय खटावली निवासी सन्नी पुत्र मोहर सिंह की।
अर्धविक्षिप्त होने के कारण परिवार के लोगों ने उसे एक चारपाई से बांधा हुआ है। परिवार के पास इतना पैसा नहीं है कि वे सन्नी का किसी अच्छे अस्पताल में इलाज करा सके।
मजदूरी करके दस सदस्यों के परिवार का पेट पालने वाला खटावली गांव निवासी मोहर सिंह का पुत्र सन्नी जन्म से ही अर्धविक्षिप्त होने के कारण दोनों पैरों से विकलांग था।
इसलिए वह 10 साल की उम्र तक चल भी नहीं पाया, जिसके बाद परिजनों ने किसी तरह राशि की व्यवस्था करके उसके पैरों का इलाज कराया। पैरों का इलाज कराना परिवार के लिए राहत के बजाय तकलीफदेह रहा, क्योंकि पैर सही होने के बाद वह खेतों में चला जाता था।
मानसिक रूप से परेशान होने के कारण वह उल्टी सीधी हरकतें करने लगा जिसके कारण परिवार के लोगों के लिए वह नित नई परेशानी खड़ी कर देता। परेशान परिवार के सदस्यों ने उसके पैरों को जंजीर से जकड़ चारपाई से बांध दिया। पिछले 10 सालों से सन्नी जंजीर से बंधा रहता है।
इलाज कराने के लिए पैसा नहीं :
सन्नी के पिता मोहरसिंह ने बताया कि उसने मेहनत मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से उसके पैरों का तो इलाज करा लिया लेकिन अब उसके पास इतनी व्यवस्था नहीं है कि वह उसका इलाज करा सके।
प्रशासन की तरफ से भी आज तक उसे किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिली है जिससे उसको चारपाई से बांधे रखना परिवार के लिए मजबूरी हो गया है।