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चामुंडा मंदिर हादसा : हांफी राहें, टूटा दम

जोधपुर.किले की दीवारें अवाक् रह र्गई। संकरी राहें सिसकने लगीं। एक पल में कई गोद सूनी हो गईं। जयकारों के बीच ‘मां-मां’ की पुकारें गूंजने लगीं। किले के सदियों के इतिहास में मंगलवार को एक स्याह पल में कलंक लग गया।

जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित चामुंडा माता मंदिर व्यवस्था में लापरवाही का स्थाई दस्तावेज बन गया! ..लापरवाही की फिसलन, हजारों श्रद्धालु.. प्रशासनिक अमला नदारद।

कभी जयघोष से गूंजने वाली किले की बुर्जियां घायलों की हृदयविदारक चीत्कारों से जार-जार हो र्गई। ऐसे हालात में भी शहर ने दिखाया, जोधपुरी परंपरा में कितना माद्दा है। बाकी बेटे आ जुटे, टैक्सी वाले निशुल्क सेवाएं देने लगे, रक्त देने के लिए अस्पताल में कतारें लग गईं..

फिसलन भरा हादसा

नारियल फोड़ने से निकले पानी की फिसलन से लोग एक दूसरे पर गिरते गए और पैरों के नीचे दबने से ज्यादातर मौतें हुईं।

अफवाह की भगदड़

जैसे ही कुछ लोग गिरे, कहीं दीवार गिरने, तो कहीं बम की अफवाहें फैल गईं, जिससे भगदड़ मच गई।

खामियों का इंतजाम

मंदिर व रास्ते में नारियल फोड़ने को प्रतिबंधित नहीं किया गया था। बेरिकेड्स इस तरह लगाए थे कि रास्ता मात्र 5 फीट का रह गया।

बुझ गए चिराग

मरने वालों में ज्यादातर पुरुष थे, उनमें भी युवा व किशोर अधिक हैं। 12 से 26 वर्ष के युवकों की संख्या अधिक बताई जा रही है।

फूट पड़ा गुस्सा

लोगों में इस हादसे की वजह से इतना गुस्सा था कि सांसद की पिटाई कर डाली व विधायक को भी खरी-खोटी सुना दी।

हर जगह चल रहा था इलाज

शहर के निजी अस्पतालों में भी कोहराम मचा हुआ था। अस्पतालों के बाहर कोई रो रहा था तो कोई अपने रिश्तेदार को ढूंढ रहा था। कहीं पर शव को घर ले जाने की तैयारी थी तो कही पर हाथों में उठाए बेहोश लोगों को लाया जा रहा था।

कमोबेश आठ से दोपहर बारह बजे तक यह दृश्य शहर के निजी अस्पतालों में देखे गए। भीतर के दृश्य तो रुलाने वाले थे। अस्पतालों के इंतजार कक्ष ही मुर्दाघर बने हुए थे। लाशें कतार में रखी थीं। पुलिस मृतकों की शिनाख्त कर रही थी तो परिजन शव के पास विलाप कर रहे थे। गोयल अस्पताल में 31 जनों की मौत हुई।

एमडीएम के समीप होने से दुर्ग से कई गंभीर घायलों को गोयल अस्पताल लाया गया। अस्पताल के बाहर पुलिस का जमावड़ा था तो परिजनों की भीड़। भीतर स्ट्रेचर पर कइयों का उपचार किया जा रहा था। अंडर ग्राउंड में बड़ा कमरा जहां मरीजों के परिजन इंतजार करते हैं, वो कक्ष मुर्दाघर नजर आया।

करीब एक दर्जन शव वहां पड़े थे। पुलिस शवों की श्निाख्त कर रहा थी। परिजन जल्द से जल्द शव ले जाने की गुहार कर रहे थे। कमला नगर अस्पताल में 28 जनों की मौत हुई। दुर्ग से घायलों को सूरसागर के रास्ते इस अस्पताल में लाया गया। अस्पताल में गमगीन माहौल था। शव एंबुलेंस में ले जाने की व्यवस्था की जा रही थी तो कई स्वयंसेवी संस्थाओं की गाड़ियां मदद के लिए आ गई। र्न्िसग स्टाफ व चिकित्सक घायलों को हर संभव उपचार देते नजर आए। मणिधारी अस्पताल में 16 जनों ने दम तोड़ा।

कनात की स्ट्रेचर बनाई

घायलों को नीचे लेजाने के लिए दुर्ग पर लगे अस्थाई हाट बाजार में लगी कनातें उखाड़ कर लोगों ने स्ट्रेचर की तरह उपयोग में लिया।

क्रेन को बनाया एंबुलेंस

हादसे के समय एंबुलेंस मौजूद नहीं होने से दुर्ग के बाहर खड़ी यातायात क्रेन को ही एंबुलेंस बनाया व उस पर घायलों व मृतकों को डालकर अस्पताल पहुंचाया। वहीं दुर्ग के बाहर खड़ी कारों, बसों व जीपों आदि में भी घायलों को अस्पताल ले जाया गया।





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balwantraj mehta
Wednesday, 1st Oct 2008, 11:36
maa ke dardhan ko nikle logo ko mautt mili. jodhpur ke itihaas me yah sarwadhik dukhad hadsa hoga. marane wale lagbhag sabhi jodhpur ke naujawan the.in sabhi ki mautt se inke ghar ujad gaye. yah ghatna jodhpur ke maharaja ke niji trust ke mandir ki hai. mandir ki vawastha ki pahli jimewaari trust ki hi honi chahiye. lekin is puri ghatna ke bare me na to trust aur na hi mahraja ke bayaan dekhane ko mile. kya is puri ghatna ki naitik jawavdari maharaja aur trust ki nahi he?
mukesh singh
Wednesday, 1st Oct 2008, 16:11
व्यवस्था में लापरवाही का स्थाई दस्तावेज बन गया! ..लापरवाही ???????
dr santosh nath
Sunday, 5th Oct 2008, 9:32
its is very sad to see becoz its a fault of everyone. we can,t blame any body