जोधपुर. मेहरानगढ़ दुर्ग में मची भगदड़ के लिए कुछ प्रत्यक्षदर्शी सांसद जसवंतसिंह विश्नोई को वीआईपी की हैसियत से दर्शन करवानेका नतीजा बता रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पुलिस ने उनको माता के दर्शन कराने के लिए रास्ता बनाकर एक ब्लॉक खाली कर दिया। इसी ब्लॉक में पीछे से करीब सैकड़ों लोग घुस गए। इसी हड़बड़ी में फिसलन भरी ढलान में लोग गिर पड़े और एक-दूसरे को कुचल दिया।
उधर, प्रत्यक्षदर्शियों ने भगदड़ की घटना की जानकारी मुख्यमंत्री, भाजपा नेताओं और मंत्रियों को भी दी। दूसरी ओर पुलिस और सांसद विश्नोई ने ऐसे किसी भी घटना से इनकार किया है।
ये कहा प्रत्यक्षदर्शियों ने :
अपने दो साथियों विजयप्रकाश और दिलीप को इस हादसे में खो चुके प्रवीण अरोड़ा व तेजराज टाक ने सर्किट हाउस में मंत्रियों को रुंधे गले से बताया कि संकरे रास्ते में महिला व पुरुषों के लिए अलग मार्ग थे। महिलाओं की संख्या कम थी।
जब सांसद वहां आए तो उनके लिए महिलाओं का रास्ता खाली कराया गया। पुलिसकर्मी उन्हें लेकर आगे बढ़े। इसी दौरान पीछे से कई लोग आगे आए और इस ब्लॉक में घुस गए। दबाव बढ़ने से बेरीकेडिंग टूट गई। पुलिस ने आगे से भी जाली वाला रास्ता बंद कर दिया। सैकड़ों लोग तीस फीट लंबी गली में दब गए। कई लोगों ने किले की दीवार पर चढ़ कर जान बचाई।
सांसद ने इसी रास्ते से दर्शन किए: एएसपी परमज्योति
प्र: दर्शनार्थियों की हिफाजत का जिम्मा आप पर था।
उ: हां, मैं ही सबसे वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर वहां मौजूद थी।
प्र: सांसद जसवंतसिंह दर्शन करने कब आए।
उ: इस हादसे से थोड़ा पहले ही आए थे।
प्र: सांसद के लिए वीआईपी मार्ग बनाया या इसी रास्ते से आए थे।
उ: सांसद के लिए अलग से रास्ता नहीं था, वे इसी रास्ते से दर्शन करने गए।
प्र: सांसद को दर्शन कराने के लिए पुलिस ने भीड़ में रास्ता बनाया।
उ: इस बारे में कुछ नहीं बता सकती, मैंने नहीं देखा, मैं काफी दूर थी।
प्र: क्या सांसद घटनास्थल से निकले, उसके बाद यह हादसा हुआ।
उ: हां, जब यह घटना हुई तब तक सांसद दर्शन कर चुके थे।
मारपीट करने वाले समाजकंटक : राठौड़
सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ का कहना है कि सांसद जसवंतसिंह के साथ अस्पताल में मारपीट करने वाले पीड़ित लोग नहीं थे, वे समाज कंटक थे। किसी जनप्रतिनिधि के साथ मारपीट करना उचित नहीं कहा जा सकता। जोधपुर की संस्कृति में इस प्रकार मारपीट करना शोभा नहीं देता।
इनका कहना है.
मैं तो साढ़े पांच बजे ही दर्शन करके निकल गया था। पहले मैंने कॉमन रास्ते से जाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण मैंने उस रास्ते से दर्शन किए, जहां लोग दर्शन के बाद बाहर निकलते हैं। हालांकि भीड़ बहुत ज्यादा थी और धक्का-मुक्की हो रही थी।
मैंने रवानगी के दौरान एक पुलिसकर्मी को भी ज्यादा फोर्स भेजकर नियंत्रण करने को कहा था। शायद उसका सरनेम गर्ग था, पूरा नाम मुझे याद नहीं। मुझे इस घटना की जानकारी यहां से निकलने के बाद एक दूसरे मंदिर में दर्शन करके लौटते वक्त हुई। तब मैं दुबारा मेहरानगढ़ गया और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने लगा।
-जसवंतसिंह विश्नोई, सांसद, जोधपुर
ऐसी बातें सामने आ रही है कि सांसद के दर्शन कर लौटने के थोड़ी देर बाद भगदड़ मच गई। जांच की जा रही है कि इस मामले में कितनी सच्चई है।
-मालिनी अग्रवाल, एसपी सिटी, जोधपुर