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पढ़ने-पढ़ाने में भरना होगी उड़ान

इंदौर. राज्य शिक्षा केंद्र के शिक्षा सत्र के जुलाई के पहले मासिक रिपोर्ट कार्ड में प्रदेश के सभी जिले फेल हो गए। सभी का परफार्मेस ‘डी’ रहा जिसमें इंदौर जिला दतिया और देवास से भी पीछे है। नीमच रैकिंग में सबसे ऊपर है। दतिया दूसरे और सीहोर तीसरे स्थान पर रहा।

भोपाल (जहां राज्य शिक्षा केंद्र का प्रमुख कार्यालय है) 30वें नंबर पर है। डिंडोरी सबसे फिसड्डी रहा जिसे 100 में से मात्र 5.97 अंक मिले। इंदौर 37.31 अंक के साथ 11वें स्थान पर रहा जबकि देवास 41.78 अंक के साथ पांचवें और धार 31.81 अंक के साथ 16वें स्थान पर रहा।

इसलिए पिछड़ा इंदौर
>> पिछले सत्र में भर्ती करवाए गए बच्चों को वापस स्कूल में नहीं ला पाए। इनकी संख्या हजारों में है।
>> माह में सिर्फ सात दिन स्कूलों का निरीक्षण किया। महीने में 15 दिन से ज्यादा निरीक्षण होना चाहिए
>> बच्चों और शिक्षकों के अटेंनडेंस रिकॉर्ड अधूरे।
>> शहर में 87 प्रतिशत स्कूल भवन नहीं बन पाए जबकि गांवों में 66 प्रतिशत स्कूल भवन का निर्माण नहीं हो सका।
>> 2 प्रतिशत स्कूल तो एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं जबकि 45 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए

ऐसे होता है मूल्यांकन
हर माह सभी जिलों से रिपोर्ट भोपाल मुख्यालय जाती है। इसके आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की जाती है। मूल्यांकन के दौरान जिला परियोजना समन्वयक व उनकी टीम द्वारा स्कूलों में किए निरीक्षण की जानकारी भी शामिल रहती है। इसके अलावा स्कूल में छात्र संख्या, सिंगल टीचर स्कूल, शाला त्यागी बच्चों के पुन: प्रवेश के साथ ही स्कूलों तथा उसमें पुन: प्रवेश करने वाले छात्रों की संख्या की जानकारी ली जाती है।

80 अंक पर एक्सीलेंट
80 से ज्यादा अंक लाने वाले को ए प्लस (एक्सीलेंट), 70 से 79.90 अंक लाने वाले को ए (गुड) तथा 60 से 69.90 अंक लाने वाले को बी ग्रेड (सेटिसफैक्टरी) माना जाता है। सी ग्रेड (एवरेज) 50 से 59.90 अंक तथा 0 से 49.90 अंक लाने वाले को डी ग्रेड (पूअर) दिया जाता है।

हर कमजोरी को दूर करेंगे
जिला पंचायत के कार्यपालन अधिकारी व पदेन अपर संचालक शिक्षा महेशचंद्र चौधरी का कहना है जल्द ही जिला व विकासखंड केंद्रों का निरीक्षण कर खामियां ढूंढ़ेंगे। सरकारी स्कूलों में प्रवेश में कमी पर भी गौर किया जा रहा है। इसके अलावा पिछले सत्र में कितनी राशि आई और कितनी खर्च की गई, उसका भी ब्योरा निकाला जाएगा। जुलाई में मात्र सात दिन निरीक्षण होने को लेकर भी जिम्मेदार से जानकारी मांगी जाएगी।

कमियां करेंगे दूर
ऐसी स्थिति क्यों बनी?
जिन लोगों को जिम्मेदारी दी गई वे उसका ठीक से निर्वाह नहीं कर पा रहे है।
तो आप क्या कर रहे हैं?
हमने पंद्रह दिन पूर्व ही जांच की है और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अनुशंसा की जा रही है।
दोषी अधिकारी कौन है?
- रिपोर्ट गोपनीय है, नाम अभी उजागर नहीं कर पाऊंगा।
आगे सुधार के लिए क्या किया जाएगा।?
हम जिला केंद्र व विकासखंड स्तर से संपूर्ण जानकारी ले रहे है और कमियों को दूर किया जाएगा।
(यह जवाब जिला पंचायत के सीईओ व पदेन अपर संचालक शिक्षा महेशचंद्र चौधरी ने भास्कर के सवालों पर दिए।)





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