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पूजन के साथ हो जन्मोत्सव भी

ग्वालियर. garba हर साल की तरह इस साल भी नवरात्र स्थापना के साथ देश में गरबा और डांडिया की धूम के साथ ही उत्सव का सिलसिला शुरू हो चुका है। भक्ति और मस्ती के बीच अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन होगा, लेकिन इसके बाद सालभर हम उनकी महत्ता भूल जाते हैं। लड़की के जन्म पर भी बेटे के जन्म की तरह खुशियां मनाएं।

समाज एक तरफ तो कन्या को शक्ति और देवी का पर्याय मानकर पूजता है, वहीं दूसरी ओर उनकी हत्या का सिलसिला अभी तक थमा क्यों नहीं है? इंडिया की फेडरेशन ऑफ ऑबेस्ट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की लक्ष्मी मारू के अनुसार देश में हर साल 80,000 महिला भ्रूण का अबॉर्शन होता है। इसी मुद्दे पर शहर के सोशल वर्कर्स का कहना है, बेटी के जन्म पर खुशियां मनाने के लिए लोगों की मानसिकता में बदलाव जरूरी है। महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी के मुताबिक देश की जनसंख्या में से 10 लाख लड़कियां कम हैं।

बेटी के जन्म पर मनाया उत्सव
६ महीने पहले बेटी का जन्म होने पर विनयनगर निवासी अनुज त्रिपाठी ने उसका जन्मोत्सव बेटे की तरह सेलिब्रेट किया। अनुज का मानना है, कन्या की पूजा करना और उसे दान देने को देवी को दान देने के बराबर समझा जाता है। जब उसे देवी का दर्जा दिया जाता है तो उसकी उपेक्षा करने का कोई औचित्य नहीं है। शास्त्रानुसार भी कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसलिए घर में कन्या के जन्मोत्सव किसी उत्सव से कम नहीं है।

उसकी बदौलत जिंदा हूं
मेरी बेटी ने न सिर्फ घर को बल्कि मुझे भी संभाला। एक परिस्थिति थी, जब हम सब टूट रहे थे। यह कहना है बसंत विहार निवासी प्रदीप राजपूत का। वे बताते हैं आर्थिक कारणों से परिवार में आई समस्या को न सिर्फ मेरी बेटी ने दूर किया, बल्कि बेटे से बढ़कर मुझे सहारा भी दिया। उसकी बदौलत आज मैं जिंदा होने के साथ खुशनुमा जिंदगी भी बिता रहा हूं।

धर्म से जोड़ना जरूरी
अष्टमी और नवमी को देवी के रूप में कन्या पूजन होता है। सालभर उन्हें यही सम्मान क्यों नहीं दिया जाता? मौका मिलने पर लड़कियां कमतर नहीं हैं। यह कहना है, सोशल वर्कर नेहा माथुर का। वे बताती हैं इसे बढ़ावा देने के लिए विज्ञापनों में लड़के के साथ-साथ लड़की के बिना परिवार अधूरा है। यह दिखाना भी बहुत जरूरी है। जिस तरह गो-हत्या को पाप माना जाता है। गो-हत्यारे का आम व्यक्ति और समाज तिरस्कार करता है। इसी तरह लोगों में यह भावना विकसित की जाना चाहिए कि कन्या भ्रूण हत्या भी पाप है। इसके लिए धर्म से जुड़े हुए व्यक्तियों को भी पहल करना होगी, क्योंकि हमारी धर्म और देवी पूजन से आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए देवी और कन्या का पूजन कर रहे हैं।





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