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हॉटलाइन निदेशकों को अवमानना का नोटिस

ग्वालियर. हॉटलाइन के एमडी समेत डायरेक्टरों को हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अवमानना का नोटिस दिया है। कोर्ट ने 18 मार्च 08 का आदेश दिए थे कि हॉटलाइन ग्लास लिमिटेड परिसर में पड़े अनयुज्ड रॉ मटेरियल, स्क्रेप तथा फिनिश गुड्स को बेचकर सहायक श्रमायुक्त के निर्देशन में कर्मचारियों का दिसंबर 06 से फरवरी 07 तक का वेतन भुगतान कर दिया जाए, और जो लोग अपना फुल एण्ड फायनल सेटिलमेन्ट करना चाहे, उनका फुल एण्ड फायनल सेटिलमेन्ट कर दिया जाए।

आदेश का उल्लंघन करने पर हॉटलाइन ग्लास लिमिटेड के कर्मचारी आशीष तिवारी और भूरालाल राय ने अवमानना याचिका प्रस्तुत की है। याचिका में पार्टी हॉटलाइन ग्लास के एमडी अनुज गुप्ता, निदेशक डीसी माथुर, संजीव नारायण, एमपी राजन, डीके तिवारी और मुकेश चतुर्वेदी को बनाया है।

मालनपुर में दर्ज है प्रकरण
हाईकोर्ट ने इस आदेश से पूर्व 7 सितंबर 07 को सुनवाई करते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे, जिसका उल्लंघन हॉटलाइन ग्लास लिमिटेड कंपनी ने 22 सितंबर 07 को किया था। श्रमायुक्त के समक्ष तीन माह का वेतन देने से भी इंकार कर दिया था। इस आदेश के बाद कंपनी के अन्दर से ट्रक में भरकर लोहा ले जाते समय कंपनी के लोग पकड़े गए थे, यह मामला मालनपुर पुलिस थाने में दर्ज है।

पैसा श्रमिकों को नहीं अधिकारियों को बांटा
कंपनी के एमडी समेत डायरेक्टरों ने हाईकोर्ट के 18 मार्च 08 को दिए आदेश का उल्लंघन कर करोड़ों रुपए का मटेरियल बिना निविदा बुलाए बेच दिया, जिसमें अनियमितता हुई। हाईकोर्ट का आदेश श्रमिकों को भुगतान के लिए हुआ था जबकि कर दिया उच्च वेतन प्राप्त करने वाले स्टाफ, ठेकेदार, वकील और प्रबंधन को। जो श्रमिक अभी कंपनी सेवा में हैं, उनका वेतन भुगतान कंपनी आज दिनांक तक नहीं किया गया है।

जनवरी 07 से बंद पड़ी है फैक्टरी
मालनपुर स्थित हॉटलाइन ग्लास लिमिटेड जनवरी 07 से बंद पड़ी है। इसमें लगभग साढ़े चार सौ कर्मचारी काम करते थे। कंपनी प्रबंधन ने 22 माह से कंपनी की इकाइयों के श्रमिकों को वेतन का भुगतान नहीं किया है। श्रमिकों ने वेतन दिलाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ज्ञापन भी दिया था।

पैसा मिल जाए तो मन जाएगी दीपावली
हॉटलाइन ग्लास लिमिटेड के आशीष तिवारी, बीएल राय समेत एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें यदि वेतन मिल जाए तो उनके परिवार के लोग दीपावली हर्षोल्लास के साथ मना सकेंगे। उनका कहना था कि वेतन न मिलने पर अधिकतर कर्मचारियों की स्थिति यह है कि वे या तो दूसरी जगह मजदूरी करने लगे हैं या अपने गांव जाकर खेती कर रहे हैं। पैसे के अभाव में कुछ कर्मचारी बीमारी का इलाज भी नहीं करा पा रहे हैं।





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